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DS Mndl समाज जिसका संगठित होगा,राज्य उसीका हो?

Artistic different Angle  yogic Style Poses in archery to Glorify Dhanushak Pride. Hail Dhanurdhari,Hail Lord Rama.
27/02/2022

Artistic different Angle yogic Style Poses in archery to Glorify Dhanushak Pride. Hail Dhanurdhari,Hail Lord Rama.

25/02/2022
रामके बंसज जब धनुषं चलाया तंब धानुष्क कहलाए, जब हल चलाए तंब कुर्मी,और जब तलवार चलाया तंब मराठा । जय धनुर्धारी समाज,जय श्...
25/02/2022

रामके बंसज जब धनुषं चलाया तंब धानुष्क कहलाए, जब हल चलाए तंब कुर्मी,और जब तलवार चलाया तंब मराठा । जय धनुर्धारी समाज,जय श्री राम ।

क्या आपको पता है ?धनुर्धारी समुदाय का गढ़हिन्दू आस्था के केंद्र दिव्य धनुषाधाम के बारेमे 💐  नेपाल के जनकपुरधाम से 21 किलो...
09/02/2022

क्या आपको पता है ?

धनुर्धारी समुदाय का गढ़
हिन्दू आस्था के केंद्र
दिव्य धनुषाधाम के बारेमे 💐

नेपाल के जनकपुरधाम से 21 किलो मीटर पूर्बोतर में अवस्थित धनुषाधाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रहती है। भारत व नेपाल से आए लोग धनुषा धाम का दर्शन करना नहीं भूलते हैं।
धनुषा धाम का त्रेता युग से संबंध है। यहा पर एक धनुषं मन्दिर है । प्राचीन मान्यता के अनुसार जब प्रभु श्रीराम द्वारा शिव धनुषा तोड़ा गया तो धनुषका एक टुकड़ा आकाश, व दूसरा टुकड़ा पाताल व तीसरा टुकड़ा धरा पर गिरा। वहीं स्थान धनुषाधाम है। अभी धनुष टुकड़ा एवम अवशेष के रूपमे है। धानुष्क समुदाय में स्वभाव तह ही धनुषं एवम धनुर्धारी भगवान के प्रति आसिम प्रेम होने के कारण इस क्षेत्र के इर्दगिर्द बढ़ी संख्या में एकत्रित होगए और इसे संरक्षित किए । अब तो भारत सरकार भी इसको अपने रामयण सर्किट अवधारणा से जोड़ दिए है । प्रत्येक बर्ष धनुषाधाम में टूटे धनुष का टुकरा धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है। यह एक दिव्य चम्तकार से कम नही है । यह धनुर्धारी समाज के इतिहास एवम धनुषं की शक्ति की आधुनिक युगमे उपलब्ध एक जीता जागता प्रमाण है । इसलिए धनुषं पर ही जनकपुर आशपस के सम्पूर्ण क्षेत्र का नामकरण धनुषा जिला रखा गया है । युग बिते युग आया पर धनुषं पर धानुक़ का हमेशा बिशेष आस्था देखने को मिलती है । एक बार जरूर आप यहा आकर प्रत्यक्ष दर्शन करें यदि धानुक़ गरिमा और इतिहास से रूबरू होना चाहते है । यहा का मेयर श्री बालेश्वर मण्डल जी भी धानुक़ समुदाय से ही आते है । धानुक़ गरिमा को जन जन तक पहुचाने के लिए हर गाउ एवम बस्ती में धनुषं और धनुर्धारी पूजा का प्रारम्भ होना चाहिए । जय धर्म,जय धानुक़ । जय धनुषं, जय श्री राम ।

 े_ही_घटे_धानुक़_का,  #धर्म_कभी_न_घटे_धानुक़_का                                   #सचाईरघुकुल रीत सदा चली आयी         ाघो_...
07/02/2022

े_ही_घटे_धानुक़_का,
#धर्म_कभी_न_घटे_धानुक़_का

#सचाई
रघुकुल रीत सदा चली आयी
ाघो_समाज

 #नमामि_धानुष्क_अवतारमयुग गए युग आया धानुक़ का कर्म  बदला लेकिन धनुर्धारी पहचान नही बदला । वही जो केवल परिस्थिति बस धनुर्...
07/02/2022

#नमामि_धानुष्क_अवतारम

युग गए युग आया धानुक़ का कर्म बदला लेकिन धनुर्धारी पहचान नही बदला । वही जो केवल परिस्थिति बस धनुर्धारी बने हुए थे उनक़ी तो
धनुर्धारी पहचान बदला क्योंकि यह उनका अपना मौलिक कर्म नही था। इसलिए भी राम धानुक़ थे क्योंकि श्री राम के बंश में सबकी मौलिक कर्म धनुर्धारी होना था,भरत हो या शत्रुघ्न,लव हो या कुश,,या वीर वर लक्ष्मण जी ही क्यों न हो । सबके सब धानुष्क थे ।

आपके मनमे प्रश्न उठ सकता है कि श्री राम में धानुष्क या अस्त्रः सशत्र जोड़ने की क्या आवश्यकता है ? तो शंखा को दूर करने के लिए आप गीता देखे जो श्री राम रूप की असली पहचान को दर्शता है । भगवान श्री कृष्ण अपने बिभूति योग को वर्णन करते हुए बतलाते है ।

रामः शस्त्र भृतामहम् ...【 अध्याय १० - श्लोक ३१】

#अर्थ : शस्त्र धारियों में मैं राम हूँ ।

~शस्त्र धारियों में मैं राम हूँ ... राम ... केवल राम नहीं ... शस्त्रधारी राम ...धनुषधारी राम अर्थात धानुष्क राम,,, राम नित्य धनुषधारी राम ही है । विना शस्त्र , विना धनुषं राम नहीं । जय धानुक़,जय श्री राम ।

धानुक़  #लव की  #बंसज कैसे ?💐जैसे दुसाध समाज अपने कुल देवता अपने कुल के राजा जयवर्धन सहलेश को मानते है । ऐसे ही बहुसंख्यक...
05/02/2022

धानुक़ #लव की #बंसज कैसे ?

💐जैसे दुसाध समाज अपने कुल देवता अपने कुल के राजा जयवर्धन सहलेश को मानते है । ऐसे ही बहुसंख्यक धानुक़ समाज की कुल देवता राघो है । राघो मैथिली में भगवान श्री राम चन्द्र जी को कहा जाता है । धानुष्क श्री राम के दो पुत्र हुए धानुष्क लव और धानुष्क कुश ।कुश के बंसज कुशवहा हुए । तो धनुर्धारी धानुक़ किसका होगा ? इसलिए धानुक़ इस आधार पर लव की बंसज पुष्टि हो जाता है ।

नानक निक कहै बिचारधानुक़ रूप लियो करतार ।।💐 #गुरुग्रन्थसाहिब【करतार अर्थ भगवान】
05/02/2022

नानक निक कहै बिचार
धानुक़ रूप लियो करतार ।।💐
#गुरुग्रन्थसाहिब

【करतार अर्थ भगवान】

जैसे गौ चराने वाले की जाती ग्वाले होते थे, ऐसे हि धनुष चलाने वाले की जाती धानुष्क । श्री कृष्ण ग्वाले जाती से थे और श्री...
03/02/2022

जैसे गौ चराने वाले की जाती ग्वाले होते थे, ऐसे हि धनुष चलाने वाले की जाती धानुष्क । श्री कृष्ण ग्वाले जाती से थे और श्री राम धानुक़ जाती से । आज गाय एवम भैष हर जाति के लोग पालन करते है फिर भी वे ग्वाले नही कहलाते,,ग्वाले तो खास जाती ही है । ऐसे ही धनुषं कोई नही चलता फिर भी धानुक़ तो खास जाती हि है । मतलव स्पस्ट है जिनका पूर्वज का मुख्य कर्म जो था उनकी जाति आज भी वही है । इसलिए धानुक़ समाज धानुष्क श्री राम के जाती से है ।और ये मत कहना कि रामायण काल में जाति नही थी क्योंकि श्री रामायण अनुसार सबरी की जाती भिलनी बताया गया है । रामायण काल मे भी जाति थी परन्तु थर प्रचलन में नही थे ।

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