05/08/2024
🚩🍀जगन्नाथ और रघुदास: भगवान जगन्नाथ का कटहल चोरी प्रसंग |🍀✍🏽
एक बार रात के समय श्री जगन्नाथ भगवान अपने भक्त रघुदास जी के पास आते हैं जो जगन्नाथ पुरी में ही रहते हैं ओर कहते है रघु चलो आज हम राजा के बागीचे से कटहल चुराते हैं या फिर हम दोनों मिलकर उसका पान करेंगे |
जगन्नाथ जी की बात सुन कर के रघु ने कहा लेकिन आपको कटहल चुराना क्यू है ? यदि आप कटहल खाना चाहते हो तो मैं राजा से कहकर आपके लिए कटहल लाऊंगा। लेकिन यह सुनकर श्री जगन्नाथ जी ने कहा- नहीं रघु ऐसे तो मुझे हर दिन सभी चीज मिलती है
🍀श्री जगन्नाथ जी और रघुदास: माखन की चोरी की राह में एक अनूठा किस्सा🍀
ऐसे तो मेरे पास किसी चीज की कमी नहीं ऐसे तो मेरी मैया यशुदा मेरे लिए इतना माखन मलाई बनाती है और खिलाती है लेकिन फिर भी मै गोपियों के घर माखन चुराने जाता हूं | पता है क्यू क्यूकी चुराके खाने में जो आनंद आता है उसका स्वाद ही कुछ अलग है | इस तरह का आनंद असानी से मिलने वाली चीज़ो में नहीं मिलता, इसलिए मैं चाहता हूं आज मैं तुम्हें भी इस आनंद की अनुभूति कराऊं |
रघुदास ने कहा नहीं, मुझे ऐसी कोई अनुभूति नहीं करनी, अगर राजा को इस बात का पता चल जाए तो वह आपको कुछ नहीं कहेगा, लेकिन मेरा क्या होगा ये सोचा आपने, रघुदास जी के बार बार मना करने पर भी श्री जगन्नाथ जी उन्हें कटहल चुराने के लिए विवश करने लगे |
🍀रघुनाथदास जी के साथ भगवान जगन्नाथ की कटहल चुराई कहानी🍀✍🏽
आख़िरकार रघुदास जी क्या करते थक हार कर भगवान जगन्नाथ की बात माननी पड़ी | और फिर क्या था भगवान जगन्नाथ या रघुनाथदास जी चल पड़े राजा के बाग से कटहल चुराने दोनों बगीचे में पहुँच जाते है | और एक बड़े पेड़ को देखते हुए जगन्नाथ जी बोलते हैं देखो रघु ये पेड़ कितना विशाल है कितने सुंदर कटहल लगे हैं इसपर तुम इस पेड़ पर चढ़ जाओ |
मैं यहां नीचे खड़ा हूं तुम ऊपर से कोई अच्छा वाला फल तोड़कर नीचे फेक देना, और नीचे से मै उसे पकड़ लूंगा और फिर तुम नीचे आ जाना धीरे से फिर हम यहाँ से भाग जायँगे | अब रघुदास जी इसमें क्या बोलते भगवान तो पहले से ही इन सब कामो में प्रवीण है माखन चुराना हो कटहल चुराना हो या अपने भक्तों का मन उनसे अच्छा कोन जानता है |
फिर क्या था रघुदास जी चढ़ गए कटहल के पेड़ पर उन्हें एक अच्छा बड़ा सा एक कटहल तोड़ लिया ओर नीचे आवाज लगाई जगन्नाथ प्रभु क्या आप तैयार हो मैं फल नीचे फेक रहा हूं उसे पकड़ लेना | जगन्नाथ जी ने कहा हां हां मैं यहीं पर हूं तुम फेंको उसे पकड़ लूंगा ये सुनकर रघुदास ने तो फल नीचे फेंक दिया |
लेकिन जैसे ही रघुदास जी ने फल फेका लेकिन वहा भगवान जगन्नाथ तो थे ही नहीं ओर फल जमीन पर जा गिरा और दो हिसो में टूट गया |
🍀राजा के सिपाहियों का आश्चर्य🍀✍🏽
जब राजा के सिपाहियों ने ये आवाज़ सुनी तो उन्हे पता चल गया कि जरूर कोई कटहल चुराने आया है वे सब दौड़ते हुए वहां आ गए |
सिपाहियों को ये देख बहुत हैरानी हुई उन्होंने देखा एक बड़ा फल नीचे गिरा पड़ा है और रघुदास जी पेड़ के ऊपर बैठे हैं सिपाहियों ने तुरंत जाकर राजा को सुचना देते हुए कहा, आपको सुचित करना पड़ रहा है की आपके बगीचे में आज महात्मा रघुदास जी कटहल का फल चुराने आए थे ओर अभी भी वो पेड़ पर बैठे हैं |
🍀“रघुदास जी के चरणों में: भगवान जगन्नाथ के नाम पर कटहल का बगीचा”🍀✍🏽
यहां सुनकर राजा को भी बहुत आश्चर्य हुआ कि रघुदास जी कटहल चुराने कैसे आ सकते हैं ऐसा सोचते हुए राजा तुरंत वहा पहुंच गए | जब राजा ने जा कर देखा तो रघुदास जी अभी भी पेड़ पर ही बैठे थे राजा ने रघुदास जी को नीचे आने के लिए कहा, फिर राजा ने उनसे पूछा कि मेरे प्रिय प्रभु भक्त रघुदास जी अगर आपको कटहल खाने की इच्छा थी |
आपने इतनी रात को मेरे बगीचे में आने का कष्ट क्यों किया अगर आप कहते तो मै ये फल आपकी कुटिया में भेजवा देता | अब रघुदास जी क्या उत्तर देते उन्होंने राजा को जगन्नाथ जी की सारी बात बताई | कि किस प्रकार जगन्नाथ जी ने उन्हें चोरी करने के लिए कहा था और फिर वो खुद मुझे यहाँ अकेला छोड़ के गायब हो गए | राजा और सिपाही सभी लोग हसने लगे सभी लोगो ने प्रभु जगन्नाथ और रघुदास जी की इस लीला का आनंद लिया |
राजा भाव विभोर होकर रघुदास जी के चरण में पड़ गए और इस बात से खुश होकर की भगवान को मेरे बगीचे के कटहल इतने पसंद है तो उन्होंने पूरा बगीचा भगवान जगन्नाथ जी के नाम कर दिया | और आज भी जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ को उस बगीचे के कटहल का भोग लगता है |
जय श्री मन्नारायण 🙏🏽🙏🏽