The Life Divine with Guru Siyag

The Life Divine with Guru Siyag God is the subject of visualization & realization. Experience the ultimate truth with Guru Siyag.

03/08/2025

"Samarth Sadgurudev Shri Ramlal ji Siyag" says a bitter truth of Western Culture that the culture is being an obstacle for Indian Vedic Philosophy in India.

अद्भुत है  सद्गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग के नन्हें साधक।समर्थ सद्गुरुदेव की लीला  रहस्यमयी व मानवीय बुद्धि से परे है। ग...
22/10/2024

अद्भुत है सद्गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग के नन्हें साधक।

समर्थ सद्गुरुदेव की लीला रहस्यमयी व मानवीय बुद्धि से परे है। गुरुदेव हमें प्रतिक्षण कुछ ऐसे अनुभव देते है जिससे ये ही प्रतीत होता है प्रतिपल उन्हीं के द्वारा नियत व नियंत्रित है। ऐसा ही एक अनुभव जो मेरे साथ घटित हो रहा है जिसका माध्यम एक नन्हा साधक है ।

ये वो नन्हा साधक जो गर्भ से गुरुदेव से दीक्षित है। पूज्य गुरुदेव से दीक्षित होने पर भी अपने प्रारब्ध के कारण अपने जन्म उपरांत ही अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है। परन्तु प्रभु की कृपा व करुणा प्रतिपल उस नन्हे साधक पर बरस रही है कि वह गुरुप्रेम से ओतप्रोत हो रहा है।

वह साधक अपने गुरु से मिलने को तत्पर है।
एक निश्छल प्रेम का अद्भूत अनुभव जहा गुरुदेव से कुछ नही मांगना केवल सद्बुद्धि व ध्यान । वास्तव में गुरुदेव के नन्हें साधक विलक्षण है क्योंकि ये अपने आध्यात्मिक सफर के उस स्तर पर है जहां केवल उनके लिए गुरुदेव और केवल गुरुदेव ही है। ना कोई अंहकार, ना कोई ईष्या, ना कुछ मांगना और ना ही किसी से कोई तुलना। केवल प्रेम करना और प्रेम से गुरुदेव को पुकारना। अपने प्यारे गुरुदेव की तस्वीर को निहारना, उनके श्री चरणों को ढूढ़ना , उनकी तस्वीर से बातें करना, गुरुदेव की स्पीच सुनना और अपने प्यारे गुरुदेव के भजनों को सुनकर गाने का प्रयास करना।

अपने दैनिक जीवन की कठिनाइयों के साथ - साथ भी गुरुदेव से इस प्रकार का जुड़ाव केवल गुरूदेव की असीम कृपा से ही संभव । पूज्य गुरुदेव के साधक के रूप में यह परम् सौभाग्य है मेरा की गुरुदेव मुझे ऐसे साधको के साथ रहने का अवसर दे रहे है जो वास्तव में अद्भुत और प्रेणादायी है।

🌷समर्थ सद्गुरुदेव की जय🌷

प्रभु आपकी लीला अपरम्पार है।🙏

How is Guru Siyag's Shaktipat Initiation Transformers human  life ? Shaktipat initiation from an enlightened & empowered...
05/09/2024

How is Guru Siyag's Shaktipat Initiation Transformers human life ?

Shaktipat initiation from an enlightened & empowered guru is a blissful process of human life.By receiving energy from guru siyag we can experience expanded awareness, heightened intuition & a deeper connection to the divine, ultimately leading to a more profound understanding of reality & the self.

The practitioner could experience a variety of transformative processes after the initiation.These processes shift one dimension of consciousness to another unlocking higher state of awareness & spiritual growth.

Guru Siyag initiates their disciples to a divine mantra. This divine mantra not only awakens kundalini power in the human body but also brings miraculous changes in human life.

I am truly blessed to have my adorable Gurudev Shri Ramlal ji siyag in this human life.Who not only initiated me by his grace but also led my spiritual journey.

🙏 Jai gurudev 🙏

05/06/2024

Gurudev explains exactly what Maharishi Aurobindo wrote for him. Gurudev reveals about himself & his purpose of incarnation.Only GSSY meditation we can realize the truth .

"आध्यात्मिक यात्रा आत्मा की यात्रा है - गुरु सियाग"समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने मानव मात्र को अपनी दिव्य वाण...
23/07/2023

"आध्यात्मिक यात्रा आत्मा की यात्रा है - गुरु सियाग"

समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने मानव मात्र को अपनी दिव्य वाणी में बार- बार अपने आत्मिक स्वरुप से अवगत करवाया है। गुरुदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि "तुम शरीर नहीं हो तुम आत्मा हो और आत्मा अजर अमर है"। आत्मा की ना तो कोई जाति है ना ही कोई देश और ना ही जेंडर के आधार पर उसका विभाजन किया जा सकता है। वो तो अपनी यात्रा को पूर्ण करने के लिए कार्मिक बीजों के आधार पर एक शरीर का चुनाव कर उसे धारण कर अपने यात्रा को पूर्ण करने की ओर अग्रसर होती है।

एलिज़ाबेथ हार्पर कुचिनीकी नाम की विदेशी साधिका जब गुरु सियाग के दर्शन के लिए आई तब उसकी माँ ने कहा कि गुरूजी यह कहती है कि मैं पिछले जन्म में पायलट थी और उस विदेशी साधिका ने मात्र 11 वर्ष की आयु में प्लेन लैंड कर दिया जो बहुत ही अचम्भित करने वाली बात है इस पर गुरुदेव ने फरमाया की आत्मा के कोई जेंडर नही होता वो जो चाहे वो शरीर धारण कर सकती है।

जब हमारे पूज्य गुरुदेव ने हमें इतना सब कुछ बताया है तो इस शरीर रूप यंत्र के आधार पर आध्यात्मिक यात्रा का विभाजन क्यों किया जाता है? प्रत्येक आत्मा ने मानव शरीर धारण किया है जिसकी अपनी शक्तियाँ, सीमाएं व कार्मिक बंधन इत्यादि है। समर्थ गुरु को प्रत्येक आत्मा की आध्यात्मिक यात्रा को किस प्रकार पूर्ण करवाना है पूर्णतः ज्ञात है अतः साधक को बुद्धि का प्रयोग कम करते हुए अपने गुरु के प्रति श्रद्धा भाव रखे।
गुरुदेव सदैव कहते है कि हम देख पीछे रहे है और चल रहे है आगे अतः जो अन्य युगों में हो चुका है उसका अनुकरण कलयुग में संभव नही है। प्रत्येक युग का अपना गुणधर्म व प्रकृति है तथा उसी के अनुसार साधना की पद्धति है। बौद्धिक आधार पर अध्यात्म की गहराइयों नहीं समझा जा सकता उसे केवल स्वयं के अनुभव व चेतना के विकास द्वारा अर्जित किया जा सकता है। चूँकि गुरु सियाग स्वयं कल्कि है अतः वह मानव मात्र को सभी संकीर्ण मानसिकताओं से ऊपर उठाते हुए एक दिव्य जगत का निर्माण कर रहे है। श्री गुरुदेव मातृशक्ति कुंडलिनी को जाग्रत कर उसे ऊर्ध्वगमन की ओर प्रेरित करते है।मातृशक्ति के चेतन हुए बिना शिवत्व को नहीं जाना जा सकता है।
गुरु समर्पण भी करवाएंगे, गुरु आपके भीतर के सारे स्वरूप भी दिखाएंगे, गुरु साधना की अग्नि में तपा कर शुद्ध भी बनाएंगे, व गुरु प्रतिपल आपको जगायेंगे। साधन चाहे कोई भी हो यदि प्रभु को जानने की अभीप्सा है तो गुरु सभी बाधाओं को पार करवा कर सचिदानंद की ओर अवश्य ले
जायेंगे।
🙏 जय गुरुदेव🙏

29/06/2023
साधना में भटकाव कब, क्यों एवं  कैसे ? व साधक के नैतिक कर्त्तव्यसवर्प्रथम समर्थ सद्गुरुदेव के श्री चरणों में नमन करते हुए...
13/06/2023

साधना में भटकाव कब, क्यों एवं कैसे ? व साधक के नैतिक कर्त्तव्य

सवर्प्रथम समर्थ सद्गुरुदेव के श्री चरणों में नमन करते हुए गुरुदेव के श्रीमुख से निकला हुआ एक ब्रह्मवाक्य याद आ रहा है कि "मुक्ति कोई खिलौना नही है जो गुरु साधक को यूंही दे दे उसके लिए तपस्या करनी पड़ती है स्वयं को गुरुकृपा से विकसित करना पड़ता " और आध्यात्मिक यात्रा का मार्ग बहुत सारे उतार- चढ़ावों से व चुनौतियों से भरा है। ना ही कोई चमत्कार है जो रातो- रात साधक का कायाकल्प कर दे। साधना स्वयं के भीतर ही चलने वाला एक तपोयज्ञ है जिसमें साधक तप कर शुद्धिकरण को प्राप्त करता है।

साधना एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है । साधक चाहे साधना की कितनी ही अच्छी अवस्था में क्यों ना हो उसे स्वयं का विश्लेषण करते हुए गुरु के प्रति एकनिष्ठ भाव से समर्पित रहना आवश्यक है। जब - जब अवतार पृथ्वी पर आए उन्होंने भी मानवमात्र के कल्याण के लिए स्वयं के गुरु के प्रति समर्पण व एकनिष्ठता को प्रासंगिक किया है।

आध्यात्मिक मार्ग में साधक के भटकाव का एक मात्र कारण है अपने गुरु के प्रति एकनिष्ठता का अभाव उनके प्रति पूर्ण रूप से सच्चे व ईमानदारी ना होना।साधक चाहे कितने ही आडंबर करे गुरु को प्रतिक्षण सब कुछ विदित होता है। चाहे कोई कितना ही उच्चकोटि का साधक हो गुरु के सम्मुख नगण्य है। साधना में भटकाव कभी भी हो सकता है साधक अंतिम अवस्था की स्थिति तक जा कर भी भटक सकता है।इसके बहुत से कारण हो सकते है।
साधना जितनी रोचक है उतनी ही उबाऊ भी है। इसलिये साधक को सरल भाव से चलते हुए स्वयं को मोटिवेट करना आवश्यक है।यदि साधक गुरु के प्रति सच्चा है तो गुरु कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साधक के मनोबल को बढ़ाते हुए उसे साधना की ओर प्रतिक्षण प्रेरित करते है। यदि कठिन परिस्थितियों में गुरु के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति की आश्रय में साधक जाता है तो उसका भटकना निश्चित ही है। गुरु के अतिरिक्त इस संसार में साधक का कोई हितैषी नही है। गुरु के श्रीमुख से निकले उपदेशों को ना सुनना, उन पर चिंतन मनन ना करते हुए यथार्थ में उन्हें अंगीकार ना करने से साधक का योगभ्रष्ट होना निश्चित है।

साधक का मूल नैतिक कर्त्तव्य है कि वह अपने गुरु के श्रीमुख से निकले दिव्य उपदेशों का सच्चाई के साथ पालन करे। उसके चिंतन, मनन व श्रवण में केवल गुरु ही हो। केवल गुरु के आदेश पर यथासंभव गुरु दर्शन का प्रचार करे। जीवन के प्रत्येक कार्य को गुरु की आज्ञा अनुसार ही करे।

🙏जय गुरुदेव🙏

साधक  का  गुरु से भौतिक सानिध्य व गुरु तत्व को अपने भीतर पानागुरुदेव के श्री चरणों मे वंदन करते हुए अपने निजी अनुभव को स...
04/06/2023

साधक का गुरु से भौतिक सानिध्य व गुरु तत्व को अपने भीतर पाना

गुरुदेव के श्री चरणों मे वंदन करते हुए अपने निजी अनुभव को साझा कर रही हु। एक साधक के रूप में गुरुदेव की अहैतुकी कृपा को सदैव जीवन मे पाया है। जीवन का प्रतिक्षण गुरुदेव से ही है, गुरुदेव के लिए ही है, व गुरुदेव द्वारा ही संचालित है। एक साधक के जीवन में गुरु से बढ़कर कुछ भी नहीं है। जब चर्चा गुरु के साधक से भौतिक सानिध्य की होती है तो साधक सदैव गुरु के भौतिक रूप के दर्शन के लिए लालयित रहता है। गुरू का सरल, ओजपूर्ण व अत्यंत ही प्रेमस्वरूप सगुण साकार रूप तथा गुरुमुख से निकली दिव्यवाणी साधक को सदैव गुरुदर्शन की ओर आकर्षित करती है।

एक साधक के लिए गुरुदेव का सानिध्य व सामीप्य गुरु के आशीर्वाद से व साधक के गुरुवर से अनंत जन्मों के संबंधों का प्रतिफल है। परन्तु इस भौतिक सामीप्य से साधक कभी भी गुरुतत्व को नही जान पाता । अर्जुन भी श्री कृष्ण को कहाँ जान पाए थे महाभारत की रण भूमि से पूर्व।

चूंकि गुरुदेव ने मुझे अपनी कृपा से समय- समय दर्शनलाभ दिया है फिर भी मैंने साधना के अनुभवों से यही जाना कि गुरुतत्व को अपने भीतर जानना व उसे अपने भीतर व चहुओर अनुभव करना अत्यधिक आवश्यक है चाहे गुरु का भौतिक सामीप्य मिले ना मिले। गुरु का वास्तविक मार्गदर्शन , प्रेम व ममता का सत्य गुरु को स्वयं के भीतर अनुभव करने पर ही प्राप्त होता है भले ही गुरु भौतिक रूप में उपस्थित ना हो।
गुरु के भौतिक रूप में एक आवरण है जिससे पार गुरु के सचिदानंद स्वरूप को साधक नही पहचान पाता। परंतु साधना द्वारा साधक के भीतर के सभी अंधकार धीरे- धीरे समाप्त होने लगते है व गुरुतत्त्व का प्रकाश साधक के ह्रदय में प्रकाशित हो जाता है।

गुरु से मिलना व गुरु में मिलना इसी के बीच की एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा पर सभी दिव्य आत्माएं आरूढ़ है।यदि साधक के भीतर गुरुतत्व की प्रबलता है तथा यदि वह करुण प्रार्थना से गुरुदेव को पुकारे तो आज भी गुरुदेव आपके सामने प्रकट हो जाएंगे। ऐसे है हमारे प्यारे समर्थ गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग व उनका सिद्धयोग दर्शन जो मानवता में तमोगुण का पतन व सतोगुण का उत्थान कर रहा है। ताकि एक दिव्य मानव का निर्माण हो जिससे पृथ्वी पर अंत काल के लिए दिव्य जीवन का आरंभ हो सके ।

🙏जय -जय गुरुदेव🙏

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