18/08/2026
🏔️✨ खैट पर्वत — उत्तराखंड का वो रहस्यमयी पहाड़, जिसे कहा जाता है “परियों का देश”!
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में एक ऐसा पर्वत है, जिसके बारे में पीढ़ियों से रहस्यमयी लोककथाएं सुनाई जाती रही हैं।
नाम है—खैट पर्वत।
हरे-भरे पहाड़ों के बीच दूर से दिखाई देने वाला यह अलग-सा पर्वत अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ नौ आंछरियों यानी परियों की लोकमान्यता के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय परंपराओं में इन्हें देवी-स्वरूप माना जाता है।
👀 लेकिन आखिर यहां ऐसा क्या है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार खैट पर्वत की नौ श्रृंखलाओं से नौ आंछरियों/देवियों की कथा जुड़ी हुई है।
गढ़वाल में आंछरी या आंछरी-मांतरी को लोकविश्वास में वनदेवियों या अलौकिक शक्तियों से जोड़ा जाता है।
कहा जाता है कि ये नौ बहनें इस पर्वत पर निवास करती हैं और आसपास के गांवों की रक्षा करती हैं।
इसी वजह से खैट पर्वत को कई लोग “परियों का देश” भी कहते हैं।
🧚 नौ बहनों की कहानी
एक प्रसिद्ध स्थानीय कथा में नौ बहनों का उल्लेख मिलता है।
कहानी के अलग-अलग संस्करणों में उनके जन्म और खैट पर्वत तक पहुंचने की कहानी थोड़ी अलग सुनाई जाती है।
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार वे बेहद सुंदर नौ बहनें थीं, जो किसी रहस्यमयी घटना के बाद खैट पर्वत से जुड़ गईं और फिर उन्हें आंछरी/परियों के रूप में पूजा जाने लगा।
यही वजह है कि आज भी इस स्थान से जुड़ी कई कहानियां स्थानीय लोगों के बीच सुनने को मिलती हैं।
😨 और फिर आती है “जीतू” की कहानी...
खैट पर्वत से जुड़ी एक और लोककथा जीतू और उसकी बांसुरी की है।
कहा जाता है कि उसकी बांसुरी की धुन से आंछरियां आकर्षित हुईं और उसे अपने साथ ले गईं।
यह कहानी स्थानीय लोकविश्वास का हिस्सा है—इसके पीछे किसी अलौकिक घटना का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
लेकिन यही लोककथाएं खैट पर्वत को उत्तराखंड के सबसे रहस्यमयी स्थानों में शामिल करती हैं।
🛕 आस्था आज भी कायम है
खैट पर्वत के आसपास खैटखाल मंदिर और भराड़ी देवी की धार्मिक परंपरा भी जुड़ी हुई है।
स्थानीय लोगों के लिए यह केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा स्थान है। 2025 में भी खैट पर्वत स्थित भराड़ी देवी मंदिर में धार्मिक आयोजन होने की खबर सामने आई थी।
🏔️ प्रकृति भी कम रहस्यमयी नहीं
खैट पर्वत की भौगोलिक स्थिति इसे और खास बनाती है।
यह आसपास के परिदृश्य में एक अलग-सी पहाड़ी आकृति के रूप में दिखाई देता है और यहां से हिमालयी चोटियों तथा घाटियों के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। उपलब्ध पर्यटन स्रोत इसे लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई वाला पर्वतीय क्षेत्र बताते हैं।
लेकिन याद रखिए—
“परियां यहां सच में रहती हैं” यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं है।
यह सदियों से चली आ रही स्थानीय आस्था और लोककथा है।
और शायद यही उत्तराखंड की खूबसूरती है…
यहां पहाड़ सिर्फ पत्थर और बर्फ नहीं हैं।
हर पहाड़ के साथ कोई न कोई कहानी, आस्था और लोकविश्वास जुड़ा हुआ है। ❤️🏔️
🤔 अब सवाल आपसे...
क्या आपने खैट पर्वत के बारे में पहले सुना था?
और अगर आपने वहां की यात्रा की है तो—
क्या आपने स्थानीय लोगों से “नौ आंछरियों” की कहानी सुनी है?
👇 अपनी जानकारी और अनुभव कमेंट में जरूर बताइए।
पहाड़ की ऐसी ही असली जगहों, लोककथाओं और रहस्यमयी कहानियों के लिए — पहाड़ी भुला को Follow करें। ❤️🏔️
#खैटपर्वत #खैटखाल #टिहरीगढ़वाल #उत्तराखंड #परियोंकादेश #आंछरी #गढ़वाल #पहाड़ीभुला