19/06/2022
आज “फ़ादर्स डे” है?
ये पाश्चात्य है। चूँकि भारत में पिता को सिर्फ़ एक दिन समर्पित करने की रीति नीति नहीं है। पद्मपुराण के अनुसार, पिता सम्पूर्ण देवताओं का स्वरूप है। [ 47/12 ]
महाभारत कहता है : “शरीरकृत् प्राणदाता यस्य चान्नानि भुंजते। क्रमेणैते त्रयोऽप्युक्ताः पितरो धर्मशासने।” अर्थात् जो गर्भाधान द्वारा शरीर का निर्माण करता है वह प्रथम, जो अभयदान देकर प्राणों की रक्षा करता है वह द्वितीय और जिसका अन्न भोजन किया जाता है वह तृतीय, यह तीनों पिता होते हैं। [ आदिपर्व 3/37 ]
मनुस्मृति, जिसे वर्तमान समय में ग्रंथों का खलनायक सिद्ध किया जाता है, अपने दूसरे अध्याय के एक सौ पैंतालीसवें श्लोक में कहती है : “आचार्याणां शतं पिता।” अर्थात् पिता सौ आचार्यों के भी अधिक गौरवशाली हैं। इसी अध्याय में ‘‘पिता मूर्त्ति: प्रजापतेः” कहकर पिता को अभिहित किया गया है कि पिता, पालन करने के अपने गुण के कारण, प्रजापति ब्रह्मा व विष्णु का मूर्तिरूप है।
महाभारत के वनपर्व में यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में यक्ष युधिष्ठिर से प्रश्न करते हैं : “का स्विदुच्चतरं खात्?” अर्थात् आकाश से ऊंचा क्या है? युधिष्ठिर ने कहा : “पिता चोच्चतरं खात्।” अर्थात् पिता आकाश से भी ऊंचा है।
महाभारत में और भी है पिता के विषय में : “पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः। पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वाः प्रीयन्ति देवता।” अर्थात् पिता ही धर्म है, पिता ही स्वर्ग है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तपस्या है। पिता के प्रसन्न हो जाने पर सारे देवता प्रसन्न हो जाते हैं।
“पिता” शब्द की चर्चा करें तो ये शब्द “पा” (रक्षणे) धातु से निर्मित होता है। शब्द विवेचना कहती है : “यः पाति स पिता!” अर्थात् जो रक्षा करता है, वह पिता है।
ऋषि यास्काचार्य का “निरुक्त’ कहता है : “पिता पाता वा पालयिता वा, पिता गोपिता!” अर्थात् पालक, पोषक और रक्षक को पिता कहते हैं। [ 4/21 एवं 6/15 ]
पिता का अपने पुत्र के प्रति कितना प्रेम, स्नेह, मोह व त्याग भाव होता है, राजा दशरथ के उदाहरण से ज्ञात होता है। पुत्र का वियोग होने पर पिता ने अपने प्राण त्याग दिये। इससे अधिक प्रेम की पराकाष्ठा क्या होगी?
शुभकामनाएँ, “फ़ादर्स डे” की नहीं बल्कि पिता की उपस्थिति की, उनके विचारों की उपस्थिति की, उनके स्नेह की, उनके परवरिश की एवं उनके आशीर्वादों की 🙏