Yogiya_Photography

Yogiya_Photography Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Yogiya_Photography, Photographer, Rishikesh.

तेरी ही शर्तों पे करना पड़े यदि क़बूल तुझे,तो ये सुहूलियत मुझे सारा जहां देता है !!
01/02/2024

तेरी ही शर्तों पे करना पड़े यदि क़बूल तुझे,
तो ये सुहूलियत मुझे सारा जहां देता है !!

आँखों का क्या है उनको तो मंज़र नए मिले,पैरों से मेरे पूछिये आवारगी के दुःख !!
20/10/2023

आँखों का क्या है उनको तो मंज़र नए मिले,
पैरों से मेरे पूछिये आवारगी के दुःख !!

10/08/2023
When pure hearts meet , every picture is so beautiful , every expression captured is full of smiles , flip over and see ...
17/04/2023

When pure hearts meet , every picture is so beautiful , every expression captured is full of smiles , flip over and see all ❣

Follow - &_photography
films & photography, make your moments timeless ❤
Call Us On - 8789086868, 6203090521
#2022 drive patna

.in .in � .in

आज “फ़ादर्स डे” है?ये पाश्चात्य है। चूँकि भारत में पिता को सिर्फ़ एक दिन समर्पित करने की रीति नीति नहीं है। पद्मपुराण के...
19/06/2022

आज “फ़ादर्स डे” है?

ये पाश्चात्य है। चूँकि भारत में पिता को सिर्फ़ एक दिन समर्पित करने की रीति नीति नहीं है। पद्मपुराण के अनुसार, पिता सम्पूर्ण देवताओं का स्वरूप है। [ 47/12 ]

महाभारत कहता है : “शरीरकृत् प्राणदाता यस्य चान्नानि भुंजते। क्रमेणैते त्रयोऽप्युक्ताः पितरो धर्मशासने।” अर्थात् जो गर्भाधान द्वारा शरीर का निर्माण करता है वह प्रथम, जो अभयदान देकर प्राणों की रक्षा करता है वह द्वितीय और जिसका अन्न भोजन किया जाता है वह तृतीय, यह तीनों पिता होते हैं। [ आदिपर्व 3/37 ]

मनुस्मृति, जिसे वर्तमान समय में ग्रंथों का खलनायक सिद्ध किया जाता है, अपने दूसरे अध्याय के एक सौ पैंतालीसवें श्लोक में कहती है : “आचार्याणां शतं पिता।” अर्थात् पिता सौ आचार्यों के भी अधिक गौरवशाली हैं। इसी अध्याय में ‘‘पिता मूर्त्ति: प्रजापतेः” कहकर पिता को अभिहित किया गया है कि पिता, पालन करने के अपने गुण के कारण, प्रजापति ब्रह्मा व विष्णु का मूर्तिरूप है।

महाभारत के वनपर्व में यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में यक्ष युधिष्ठिर से प्रश्न करते हैं : “का स्विदुच्चतरं खात्?” अर्थात् आकाश से ऊंचा क्या है? युधिष्ठिर ने कहा : “पिता चोच्चतरं खात्।” अर्थात् पिता आकाश से भी ऊंचा है।

महाभारत में और भी है पिता के विषय में : “पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः। पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वाः प्रीयन्ति देवता।” अर्थात् पिता ही धर्म है, पिता ही स्वर्ग है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तपस्या है। पिता के प्रसन्न हो जाने पर सारे देवता प्रसन्न हो जाते हैं।

“पिता” शब्द की चर्चा करें तो ये शब्द “पा” (रक्षणे) धातु से निर्मित होता है। शब्द विवेचना कहती है : “यः पाति स पिता!” अर्थात् जो रक्षा करता है, वह पिता है।

ऋषि यास्काचार्य का “निरुक्त’ कहता है : “पिता पाता वा पालयिता वा, पिता गोपिता!” अर्थात् पालक, पोषक और रक्षक को पिता कहते हैं। [ 4/21 एवं 6/15 ]

पिता का अपने पुत्र के प्रति कितना प्रेम, स्नेह, मोह व त्याग भाव होता है, राजा दशरथ के उदाहरण से ज्ञात होता है। पुत्र का वियोग होने पर पिता ने अपने प्राण त्याग दिये। इससे अधिक प्रेम की पराकाष्ठा क्या होगी?

शुभकामनाएँ, “फ़ादर्स डे” की नहीं बल्कि पिता की उपस्थिति की, उनके विचारों की उपस्थिति की, उनके स्नेह की, उनके परवरिश की एवं उनके आशीर्वादों की 🙏

Address

Rishikesh
249201

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Yogiya_Photography posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category