16/04/2026
महाराजधिराज महाराजा श्री रतन सिंह जी राठौड़ के 369 वें बलिदान दिवस पर शत्-शत् नमन
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एक युद्ध ऐसा भी,
इतिहास साक्षी है कि जब भारतभूमि पर विधर्मी शक्तियाँ अपने चरम पर थीं, तब यह युद्ध केवल सत्ता का संघर्ष नहीं था, बल्कि धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा का महासंग्राम था। एक ओर सनातन धर्म के प्रति सम्मान रखने वाले शहजादे दारा शिकोह की सेना थी, तो दूसरी ओर हिन्दू विरोधी क्रूर कट्टरपंथी बागी औरंगजेब की ।
ऐसे निर्णायक युद्ध में, रतलाम राज्य के संस्थापक महाराजधिराज महाराजा श्री रतनसिंह जी राठौड़ ने धर्मरक्षा के संकल्प के साथ दारा शिकोह की ओर से सेना का नेतृत्व करते हुए अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन किया और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त होकर अमरत्व को प्राप्त हुए।
उनका यह बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि सनातन धर्म, राष्ट्र और आत्मगौरव की रक्षा के लिए दिया गया अमर बलिदान है,इस बलिदान के साथ महाराजा रतन सिंह जी पुनः यह सिद्ध कर गए
कि जब-जब धर्म पर संकट आएगा, तब-तब राजपूताने का रक्त त्याग और वीरता की नई गाथा लिखने को सदैव तैयार रहेगा ।
मै यहां बात कर रहा हूं लगभग चार शताब्दियों पूर्व अवंतिकापुरी (उज्जैन) के पवित्र क्षिप्रा तट से कुछ मील की दूरी पर स्थित नगर धरमत (चन्द्रावतीगंज, फतेहाबाद) में हुए ऐतिहासिक धर्मयुद्ध की जो 15 अप्रैल सन् 1658 को हुआ था।
धरमत के इस धर्मयुद्ध में राजपूताना ने अपने अद्वितीय साहस, शौर्य और बलिदान का जो अमिट परिचय दिया,वह भारतीय इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में सदैव अंकित रहेगा।
इस विकट युद्ध में सेना का नेतृत्व करते हुए आगे बढ़ कर स्वयं काल को ललकारने वाले सुभट योद्धा महाराजा रतन सिंह जी राठौड़ रणक्षेत्र में शत्रुओं को गाजर-मूली की तरह काटते हुए अपने शरीर पर बैरियों की तलवारों से लगे अस्सी घावों और छब्बीस तीरों के लगने से बहते रक्त के फव्वारों के बावजूद जब तक प्राण रहे जूझते रहे और रक्त की एक एक बूंद राष्ट्र और धर्म हित बहा कर प्राण जाने पर धरमत के उस रणखेत में अमर हो गए।
महाराजा रतन सिंह जी राठौड़ के साथ उस दिन युद्ध में वीरता पूर्वक लड़कर बलिदान होने वाले योद्धाओं में उनके अनुज रणबांकुरे श्री फतेह सिंह जी राठौड़,दादेरे भाई श्री अमरदास जी व श्री भगवानदास जी सांचौरा चौहान, श्री जसराज जी बारहठ, ध्वजवाहक श्री परशुराम जी ओझा एवं पचास के लगभग चारण योद्धा भी शामिल थे।
धरमत युद्ध के बलिदानियों की 369 वीं पुण्यतिथि पर मैं महाराजधिराज महाराजा रतन सिंह जी राठौड़ सहित सभी बलिदानियों को पूर्ण श्रद्धा से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
महाराजधिराज महाराजा श्री रतनसिंह जी राठौड़ के 369 वें बलिदान दिवस पर श्री सज्जन क्षत्रिय समाज परिषद, राजपूत बोर्डिंग, रतलाम द्वारा रतलाम से फतेहाबाद स्थित स्मारक पर पहुंच कर हिन्दू धर्म अनुसार पुष्प, धूप, दीप,साफा, श्रीफल, भोग एवं आरती के माध्यम से श्रद्धापूर्वक जो भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, इस उत्तम कार्य के लिए महाराज कुमार श्री दिव्य राज सिंह जी सैलाना, श्री अमर सिंह जी सैलाना, श्री जी. जी. सिंह जी आंबा, श्री जुझार सिंह जी जोधा, श्री राजेन्द्र सिंह जी लुनेरा सहित फतेहाबाद पधारे सभी क्षत्रिय सरदारों एवं राजपूत बोर्डिंग के समस्त सम्माननीय सदस्यों को बारंबार साधुवाद।
गुरुवार,16 अप्रैल 2026
ब्रजराज ब्रज, रतलाम