13/06/2026
कर्बला का वाक़िआ (मुख्तसर)
10 मुहर्रम 61 हिजरी (680 ई.) को इमाम हुसैन इब्न अली अपने अहल-ए-बैत और साथियों के साथ कर्बला के मैदान में हक़ और सच्चाई की खातिर डटे रहे।
यज़ीद की बैअत से इंकार करने पर इमाम हुसैन और उनके साथियों को कई दिनों तक पानी से महरूम रखा गया। 10 मुहर्रम को जंग हुई, जिसमें इमाम हुसैन के 72 साथी शहीद हुए। आखिर में इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु भी शहादत के दर्जे पर फ़ाइज़ हुए।
सबक:
🌹 हक़ पर डटे रहना
🌹 ज़ुल्म के सामने न झुकना
🌹 दीन की खातिर हर क़ुर्बानी देना
नारा-ए-मोहब्बत:
“हुसैनियत ज़िंदा है, क्योंकि इमाम हुसैन ने हक़ के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।”