31/05/2026
ब्राह्मण कैसा होता है बहुत सुंदर कहा गया है कि ÷
श्लोक ÷
“करे कुशा, मुखे मन्त्राः, हृदये धर्मसंस्थितिः ।
सौम्यरूपो द्विजः शान्तः, क्रोधे कालाग्निसन्निभः ॥”
भावार्थ :
हाथों में कुशा, मुख में मंत्र और हृदय में धर्म धारण करने वाला ब्राह्मण शांत दिखाई देता है,
लेकिन अन्याय होने पर वह कालाग्नि के समान तेजस्वी बन जाता है।