09/02/2022
मैं, हिजाब की मुख़ालिफ़त करने वालों के ख़िलाफ़ ग़म व गुस्से का इज़हार नहीं करूंगा क्योंकि उनका जो काम है वो उसे बाख़ूबी अंजाम दे रहे हैं मगर हमारे बुज़ुर्गों का जो काम था उसे उन्होंने नहीं किया और न आज हम कर रहे हैं।
हमारे बुज़ुर्गों और आलिमों ने पूरे हिंदुस्तान में हर जगह मदरसे बनवा दिये लेकिन वहाँ सिर्फ़ लड़कों को तालीम देने का इंतेज़ाम किया गया और लड़कियों को नज़र अंदाज़ कर दिया गया, और तो और मदरसों को जदीद तालीम से जोड़ना गुनाह समझा वरना अबतक हमारे कई मदरसे यूनिवर्सिटी में तब्दील हो चुके होते।
जिस #मुस्लिम_यूनिवर्सिटी_अलीगढ़ का नाम सुनकर क़ौम का सीना चौड़ा होता है उसी यूनिवर्सिटी के बानी मोहसिने क़ौम ैय्यद_अहमद_ख़ाँ को मुस्लिम क़ौम के मोलवियों और मुफ़्तियों ने बुरी तरह ज़लील किया था और कहा था कि वो क़ौम को गुमराह कर रहे हैं, यहाँ तक कि उनपर कुफ़्र का फ़तवा भी लगा दिया था।
हम ने 14 सौ साल में स्कूल-कॉलेज तो कम बनाये हैं, दुश्मन ज़्यादह बनाये हैं, सुन्नी, शिया को नहीं देखना चाहता। वहाबी, देवबंदी को नहीं देखना चाहता। बरेलवी किसी को नहीं देखना चाहता। ऐसे माहौल में कौन लड़कियों की तालीम के बारे में सोचता? जो हो रहा है उसके ज़िम्मेदार हम ख़ुद हैं।
Ustad Betab Hallauri shab ki kalam se ✍️