इंजी हिमांशु ऑफिशियल

इंजी हिमांशु ऑफिशियल I am Himanshu,and I am a civil engineer by profession & a resident of Lakhimpur Kheri district of Ut

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस[1] या मई दिन मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम ...
01/05/2021

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस[1] या मई दिन मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में बम धमाका हुआ था। यह बम किस ने फेंका किसी का कोई पता नहीं। इसके निष्कर्ष के तौर पर पुलिस ने मज़दूरों पर गोली चला दी और सात मज़दूर मार दिए। "भरोसेमंद गवाहों ने तस्दीक की कि पिस्तौलों की सभी फलैशें गली के केंद्र की तरफ से आईं जहाँ पुलिस खड़ी थी और भीड़ की तरफ़ से एक भी फ्लैश नहीं आई। इस से भी आगे वाली बात, प्राथमिक अखबारी रिपोर्टों में भीड़ की तरफ से गोलीबारी का कोई ज़िक्र नहीं। मौके पर एक टेलीग्राफ खंबा गोलियों के साथ हुई छेद से पुर हुआ था, जो सभी की सभी पुलिस वाले तरफ़ से आईं थीं।"[2][3][4] चाहे इन घटनाओं का अमेरिका[5] पर एकदम कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा था लेकिन कुछ समय के बाद अमेरिका में 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया था। मौजूदा समय भारत और अन्य मुल्कों में मज़दूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित क़ानून लागू है।

भारत में एक मई का दिवस सब से पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाना शुरू किया गया था। उस समय इस को मद्रास दिवस के तौर पर प्रामाणित कर लिया गया था। इस की शुरूआत भारती मज़दूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। भारत में मद्रास के हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प के पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये। भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस पहली मई को मनाया जाता है। इसके पीछे तर्क है कि यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के तौर पर प्रामाणित हो चुका है।

महात्मा गांधी संपादित करें
महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी देश की तरक्की उस देश के कामगारों और किसानों पर निर्भर करती है। उद्योगपति, मालिक या प्रबंधक समझने की बजाय अपने-आप को ट्रस्टी समझने लगे। लोकतन्त्रीय ढांचो में तो सरकार भी लोगों की तरफ़ से चुनी जाती है जो राजनीतिक लोगों को अपने देश की बागडोर ट्रस्टी के रूप में सौंपते हैं। वह प्रबंध चलाने के लिए मज़दूरों, कामगारों और किसानों की बेहतरी, भलाई और विकास, अमन और कानूनी व्यवस्था बनाऐ रखने के लिए वचनबद्ध होते हैं। मज़दूरों और किसानों की बड़ी संख्या का राज प्रबंध में बड़ा योगदान है। सरकार का रोल औद्योगिक शान्ति, उद्योगपतियों और मज़दूरों दरमियान सुखदायक, शांतमयी और पारिवारिक संबंध कायम करना, झगड़े और टकराव की सूरत में उन का समझौता और सुलह करवाने का प्रबंध करना और उन के मसलों को औद्योगिक ट्रिब्यूनल कायम कर कर निरपेक्षता और पारदर्शी ढंग से कुदरती न्याय के उसूल के सिद्धांत अनुसार इंसाफ़ प्रदान करना और उन की बेहतरी के लिए समय -समय से कानूनी और विवरण प्रणाली निर्धारित करना है।
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रोहित सरदाना एक भारतीय समाचार एंकर थे। उन्होंने ताल ठोक के की मेजबानी की थी, एक कार्यक्रम जो भारत में ज़ी न्यूज़ पर समका...
30/04/2021

रोहित सरदाना एक भारतीय समाचार एंकर थे। उन्होंने ताल ठोक के की मेजबानी की थी, एक कार्यक्रम जो भारत में ज़ी न्यूज़ पर समकालीन मुद्दों पर चर्चा करता है। 2017 में, उन्होंने आजतक से जुड़ने के लिए ज़ी न्यूज़ छोड़ दिया, जहाँ उन्होंने डिबेट शो दंगल की मेजबानी की।

आज तक के वरिष्ठ एंकर और देश के जाने माने टीवी पत्रकार श्री रोहित सरदाना जी का कोरोना संक्रमित होने के बाद आकस्मिक निधन, अत्यंत दुःखद।

दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को दुख सहने की शक्ति दे भगवान।

शत-शत नमन एवं भावांजलि!
इंजी हिमांशु ऑफिशियल

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29/04/2021

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हेलो दोस्तो मैं आपका अपना दोस्त इंजी हिमांशु वर्मा(CIVIL ENGINEER). दोस्तो मैं आपको अपने इस युटुब चैनल के माध्यम से सभी सिवि.....

22/04/2021

Today special....

Earth Day is an annual event on April 22 to demonstrate support for environmental protection. First held on April 22, 1970, it now includes a wide range of events coordinated globally by EARTHDAY.ORG (formerly Earth Day Network)[1] including 1 billion people in more than 193 countries.

Earth Day 2021
The Earth Day 2021 theme is Restore Our Earth and features five primary programs: The Canopy Project, Food and Environment, Climate Literacy, the Global Earth Challenge, and The Great Global CleanUp.[135] During the week of Earth Day, EARTHDAY.ORG and lead organizers, Education International, Hip Hop Caucus, and Earth Uprising organized three separate parallel climate action summits on climate literacy, environmental justice, and youth-led climate-focused issues. EARTHDAY.ORG also organized the second-annual Earth Day Live livestream event (April 22, 2021) featuring global activists, international leaders, and influencers.[136] The Biden Administration organized a Leaders Summit on Climate on Earth Day 2021.
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Today special...👉जलियाँवाला बाग़ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है जहाँ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर ...
13/04/2021

Today special...

👉जलियाँवाला बाग़

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है जहाँ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था।इसी घटना की याद में यहाँ पर स्मारक बना हुआ है।

👉 स्मारक ....

इस स्मारक में लौ के रूप में एक मीनार बनाई गई है जहाँ शहीदों के नाम अंकित हैं। वह कुआँ भी मौजूद हैं जिसमें लोग गोलीबारी से बचने के लिए कूद गए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं।[1]

इस दुखद घटना के लिए स्मारक बनाने हेतु आम जनता से चंदा इकट्ठा करके इस जमीन के मालिकों से करीब 5 लाख 65 हजार रुपए में इसे खरीदा गया था। [2]

१९९७ में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। २०१३ में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि "ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।

बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ में रोलेट एक्ट, अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों व दो नेताओं सत्यपाल और सैफ़ुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में एक सभा रखी गई, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे। शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी इसमें सैंकड़ों लोग ऐसे भी थे, जो बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने और शहर घूमने आए थे और सभा की खबर सुन कर वहां जा पहुंचे थे। करीब 5,000 लोग जलियाँवाला बाग में इकट्ठे थे। ब्रिटिश सरकार के कई अधिकारियों को यह 1857 के गदर की पुनरावृत्ति जैसी परिस्थिति लग रही थी जिसे न होने देने के लिए और कुचलने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार थे।

जब नेता बाग़ में पड़ी रोड़ियों के ढेर पर खड़े हो कर भाषण दे रहे थे, तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुँच गया। उन सब के हाथों में भरी हुई राइफलें थीं। सैनिकों ने बाग़ को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलानी शुरु कर दीं। १० मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। जलियाँवाला बाग़ उस समय मकानों के पीछे पड़ा एक खाली मैदान था। वहां तक जाने या बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था और चारों ओर मकान थे। भागने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए, पर देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया।

अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियाँवाला बाग़ में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जबकि अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए। इस घटना के प्रतिघात स्वरूप सरदार उधमसिंह ने 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन के कैक्सटन हॉल में इस घटना के समय ब्रिटिश लेफ़्टिनेण्ट गवर्नर मायकल ओ ड्वायर को गोली चला के मार डाला। उन्हें 31 जुलाई 1940 को फाँसी पर चढ़ा दिया गया।
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महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले (११ अप्रैल १८२७ - २८ नवम्बर १८९०) एक भारतीय समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, ल...
11/04/2021

महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले (११ अप्रैल १८२७ - २८ नवम्बर १८९०) एक भारतीय समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फुले एवं ''जोतिबा फुले के नाम से भी जाना जाता है। सितम्बर १८७३ में इन्होने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिय इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे।
इनका मूल उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा है। फुले समाज की कुप्रथा, अंधश्रद्धा की जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया.१९ वी सदी में स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। फुले महिलाओं को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचाना चाहते थे। उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे में बनाई। स्त्रियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से फुले बहुत व्याकुल और दुखी होते थे इसीलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले को स्वयं शिक्षा प्रदान की। सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका थीं।[3]

आरम्भिक जीवन,....

कराड में स्थित ज्योतिबा फुले की एक मूर्ति
महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 1827 ई. में पुणे में हुआ था। एक वर्ष की अवस्था में ही इनकी माता का निधन हो गया। इनका लालन-पालन एक बायी ने किया। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग 'फुले' के नाम से जाने जाते थे। ज्योतिबा ने कुछ समय पहले तक मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढाई छूट गई और बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की। इनका विवाह 1840 में सावित्री बाई से हुआ, जो बाद में स्‍वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवी बनीं। दलित व स्‍त्रीशिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्‍नी ने मिलकर काम किया वह एक कर्मठ और समाजसेवी की भावना रखने वाले व्यक्ति थे।[4]

कार्यक्षेत्र.......

उन्‍होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए बहुत काम किया, इसके साथ ही किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए फुले ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री फुले को इस योग्य बना दिया। उच्च वर्ग के लोगों ने आरम्भ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए।[5]

विद्यालय की स्थापन,........

ज्योतिबा को संत-महत्माओं की जीवनियाँ पढ़ने में बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब भगवान के सामने सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं यह काम करके अपनी पत्नी सावित्री को इस योग्य बना दिया। कुछ लोगों ने आरम्भ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकालवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन स्कूल खोल दिए[6]।
इंजी हिमांशु ऑफिशियल

ग्रामीण भारत: एक चित्रकार द्वारा बहुत सुंदर चित्रण..इंजी हिमांशु ऑफिशियल
08/04/2021

ग्रामीण भारत: एक चित्रकार द्वारा बहुत सुंदर चित्रण..
इंजी हिमांशु ऑफिशियल

07/04/2021

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2021: 'एक निष्पक्ष, स्वस्थ दुनिया का निर्माण' इस वर्ष का विषय है; इतिहास और महत्व। हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के लिए, दुनिया भर के लोग गतिविधियों में भाग लेते हैं और सेमिनार में भाग लेते हैं जो स्वास्थ्य के विषय से संबंधित हैं।
World Health Day 2021: 'Building a fairer, healthier world' is this year's theme; history and significance. Every year on 7 April, World Health Day is observed. In order to celebrate this day, people around the world participate in activities and attend seminars that are related to the topic of health.

इंजी हिमांशु ऑफिशियल

The World water day.....The World Water Day celebrates water and raises awareness of the global water crisis, and a core...
22/03/2021

The World water day.....

The World Water Day celebrates water and raises awareness of the global water crisis, and a core focus of the observance is to support the achievement of Sustainable Development Goal (SDG) 6: water and sanitation for all by 2030. The theme of World Water Day 2021 is valuing water.
@इंजी हिमांशु ऑफिशियल

17/03/2021

17 मार्च की प्रमुख घटनाएँ.....

1769- ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के कपड़ा उद्योग को बर्बाद करने के लिए बुनकरों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए।
1845- लंदन के स्टीफन पेरी ने रबर बैंड का पेटेंट कराया।

1959- तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ व दलाईलामा ल्हासा छोड़कर भारत पहुंचे।

1866- आगरा उच्च न्यायालय की स्थापना की गई इसे 1869 मे इलाहाबाद स्थानांतरित किया किया गया।

1963- बाली द्वीप पर ज्वालामुखी फटने से करीब 1900 लोग मारे गए।

1969- गोल्दा मीर ने इजरायल के प्रधानमंत्नी पद की शपथ ली।

1987- आईबीएम ने पीसी-डीओएस 3.3 वर्जन जारी किया।

1987- सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया।

2010-
भारतीय बॉक्सरों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक जीत लिए। बीजिंग ओलिंपिक के कांस्य विजेता विजेंद्र सिंह के अलावा दिनेश कुमार, परमजीत समोटा, अमनदीप, सुरंजॉय व जय भगवान ने अपने-अपने वर्ग का फाइनल जीता। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का अवार्ड विजेंद्र कुमार को मिला, जबकि मेजबान भारत ने सर्वाधिक 36 अंक लेकर टीम चैंपियनशिप भी जीती। गत विजेता इंग्लैड 34 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
देश के सबसे पुराने पारंपरिक खेल कबड्डी को बढावा देते हुए पंजाब सरकार ने अगले महीने कबड्डी विश्वकप का आयोजन करने की घोषणा की।

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