18/04/2023
शुगन बता ए शुगनचिड़ी,कितीक लिखी है दुख री घड़ी
कांई म्हारो घर बचेला,या जैसाण छोड़ जाणो पड़ी ॥
सौर कंपनिया है लारे लागी,मानवता भी है छोड़ भागी
म्हारी मौत रा पड़पंच रचे हैं,अंतिम कील कद ए दागी।
तारों सू है ओरण भरी,उणमे अड़ नौ गोडावण मरी
कुछ तो बता ए चिड़ी,क्यों म्हारे में खोटी करी॥
एक म्हारे सू वादो क’री,म्हारे अस्तित्व री साख तो भरी
गोडावण रमती ही धोरों में,लड़ी जंग पण ना वो तरी॥
मित्रों गोडावण अपना दर्द सुनाकर इस शुगन चिड़ी से भविष्य पूछ रही हैं।आप लोग जानते हैं कि पूरी दुनिया में मुश्किल से १५० के लगभग ये पक्षी बचा है ।ओर अब सिर्फ़ हमारे पास ही बचा है विडम्बना इस बात की है हम जैसलमेर में इसके प्राकृतिक आवास को विकास के नाम पर निरन्तर ख़त्म कर रहे हैं।मित्रों मेरे मित्र से बेहतर इनके दर्द को शायद ही कोई समझता हो।बड़ी बड़ी संस्थायें इसे बचाने के नाम पर फंड खाये जा रही हैं पर गोडावण विकास के तारों में उलझकर मरी जा रही है।इनके दर्द को इनकी ही ज़ुबानी शेयर कर रहा हूँ मित्रों उम्मीद करता हूँ आप हमारे साथ इनका दर्द जानने के लिए फिल्ड में नहीं चल सकते लेकिन यहाँ शेयर करके ज़िम्मेदारो पर मानसिक दबाव बनाने मे हमारी मदद कर सकते है।हाल ही मे पोकरण के धौलिया मे बिजली के तारों मे उलझकर मरी गोडावण का स्टैच्यू बनाने के लिए हमने तय किया है कि आप सभी उस स्टैच्यू निर्माण मे हमारे साथ जुड़े मित्रों बनाने को तो कोई भी सक्षम व्यक्ति या संस्था अकेली ही बना सकती हैं पर भावनात्मक रूप से हज़ारों लोगों का जुड़ाव हम सब के गोडावण संरक्षण प्रयासों को मजबूती देगा।क़रीब लाख सवा लाख रूपये मे जैसलमेर हाइवे पर तालाब की पाल पर एक भव्य छोटी सी छतरी बनाकर हम सब इसके संरक्षण का संदेश दुनिया भर मे दे सकते है।मित्रों Thar desert photography हम सब ने मिलकर मिनिमम सौ रूपये ओर अधिकतम ११०० रूपये का सहयोग करने की सीमा तय की है जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोग जुड़ सके।आप लोग भी अपने विचार रखे। फिर जल्द ही एक स्टोरी मे आपको जानकारी देकर अवगत कराया जाएगा।कि कैसे सहयोग करना है । आपके तर्क वितर्क का इंतज़ार रहेगा मित्रों बेजिजक कमेंट मे बताये ओर गोडावण बचाने की मुहिम से जुड़े।क्योंकि कई मित्र देश परदेस मे बैठे वन्यजीवों के लिए करना चाहते हैं पर उन्हें धरातल पर काम करने का अवसर नही मिलता तो मित्रों धरातल पर हम आपके हिस्से का कार्य भी बख़ूबी निभा रहे हैं आप आर्थिक रूप से जुड़कर भी उतना ही कार्य निभा पायेंगे।