Si Durgesh singh

Si Durgesh singh उप निरीक्षक उत्तर प्रदेश पुलिस

साइबर ठग भेजें गए जेल :::💐
08/11/2025

साइबर ठग भेजें गए जेल :::💐

25/10/2025

पुलिस डयूटी में ही खुशियों के पल ढूढ़ लेती हैं।

Happy hour.......

10/10/2025

साइबर जगत में अपराधियों से बचने हेतु जानकारी ही बचाव हैं। #साइबर #अपराध #बचाव #रोकथाम ाइल

जिंदगी ::💐
08/10/2025

जिंदगी ::💐

08/07/2025

जीवन की असमानताएँ और समाज का व्यवहार-

धन हो तो बुद्धि नहीं होती, बुद्धि हो तो धन नहीं होता।
धन हो तो पूर्ण परिवार नहीं होता, और यदि पूर्ण परिवार हो तो धन नहीं होता।
अधिक भूमि हो तो उसके उपयोग की पूरी तरकीब नहीं होती, और यदि तरकीब हो तो भूमि नहीं होती।
इस प्रकार जीवन में कुछ न कुछ असमानताएँ अवश्य होती हैं। ऐसा कोई नहीं होता जिसके पास सब कुछ हो।
हर चीज़ एक साथ और जल्दी नहीं मिलती — कोई न कोई कमी बनी ही रहती है। यही जीवन की गति और रीति है।

लेकिन यदि किसी व्यक्ति के पास सब कुछ हो तो क्या होता है?
तब समाज और दुनिया उसके विरुद्ध हो जाती है।
जब किसी के पास धन, वैभव, प्रतिष्ठा, ज्ञान—सब कुछ हो, तो लोग अनायास ही उसके शत्रु बन जाते हैं।
ऐसा प्रतीत होता है मानो उसने किसी का कुछ छीन लिया हो।
बिना किसी स्पष्ट कारण के लोग विरोध करने लगते हैं, आलोचना करते हैं।
जब आपको पद मिलता है — लोग आपके विरुद्ध हो जाते हैं।
जब आपको प्रतिष्ठा मिलती है — लोग आपके विरुद्ध हो जाते हैं।
जब आपके पास सुख-सुविधा, आनंद और जीवन में रस होता है — लोग आपके विरुद्ध खड़े हो जाते हैं।
ऐसे लोग बस यही चाहते हैं कि आपको नीचे गिरा दें, मिट्टी में मिला दें।
इसका कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आता, परंतु यह बहुत तीव्र और आम व्यवहार है।
अक्सर लोग इसे "जलन" कहते हैं, लेकिन मेरे विचार में यह उससे कहीं अधिक गहरा है — यह भीतर ही भीतर उपजा "शत्रु-बोध" है।

ध्यान देंगे तो पाएंगे कि ऐसा व्यवहार दूर के लोग नहीं, बल्कि अधिकतर निकट संबंधी ही करते हैं।
वे आपके पड़ोसी हो सकते हैं, आपके जान-पहचान के, या फिर रक्त-संबंधी।

क्यों होता है ऐसा?
क्यों कोई किसी को, बिना कारण, अपना शत्रु मान लेता है?

दरअसल समाज में हर व्यक्ति किसी न किसी के आगे या पीछे होता ही है।
जब कोई स्वयं को दूसरों से ऊपर देखता है, तो उसे गौरव और अभिमान महसूस होता है।
लेकिन जैसे ही वह किसी को अपने से ऊपर देखता है, उसके भीतर बेचैनी और अशांति भर जाती है।
उसे लगता है जैसे वह व्यक्ति उसकी कमी को उजागर कर रहा है।
वह व्यक्ति, उसका परिवार या उसकी उपलब्धियाँ उसे बार-बार यह अहसास दिलाते हैं कि “यह चीज़ मेरे पास नहीं है।”
यहीं से शुरू होती है मृगतृष्णा — जो जल्दी प्राप्त नहीं होती, लेकिन कुंठा और शत्रु-बोध का कारण अवश्य बन जाती है।
आज के समाज में यह एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुकी है।
थोड़ा विचार करेंगे तो आप भी इसे अपने आसपास स्पष्ट रूप से महसूस करेंगे।
मेरा स्पष्ट मत है —
ऐसी सोच और भावना किसी भी व्यक्ति या परिवार के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
इनसे दूरी बनाकर ही कोई भी उन्नति और प्रगति की ओर बढ़ सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप इन नकारात्मक सोचों से बाहर आते हैं,
तब आप सच्चे अर्थों में खुश रहते हैं।
जीवन में असली आनंद 'खुश रहना' है — और वह तभी संभव है जब आप ऐसी विकृतियों से दूरी बना लें।
दुनिया में हर कोई किसी से आगे है, किसी से पीछे —
पर यह किसी के लिए भी चिंता या द्वेष का कारण नहीं होना चाहिए।
जीवन का सार यही है:
संसार सदा गतिशील है।
आप समय के साथ ईमानदारी से प्रयास कीजिए —
किसी को पीछे छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए।
किसी को नीचे गिराने के लिए नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार के सुख-समृद्धि के लिए।
लोगों के बीच प्रसन्नता बाँटने के लिए,
जीवन में आनंद भरने के लिए,
और एक सुंदर, स्वस्थ, आनंदमय समाज के निर्माण के लिए।

यही जीवन है, और यही जीवन का सार है।

✍🏻दुर्गेश सिंह

#जलन #आदमी #समाजकीसच्चाई #समाजकेविचार #नकारत्मकता #समाजजागृती #खुशीकेमन्त्र #जीवनमेसफलताकेसुत्र

06/07/2025

"असली शुभचिंतक ,
हितैषी कौन आदमी होता है?
पहचान कैसे करें ?"

जीवन में आजकल के इस स्वार्थ परक समाज में बहुत आवश्यक है कि जब लोग निकट संबंधी व नात रिश्तेदारों का प्रयोग भी स्वार्थ हित में खुलकर करते हैं ,
कर रहे है - तब समय बहुत ही सतर्क होने का है।
लाभ-हानि के आंकड़े से परख कर स्वचलित रिश्तों में आजकल अपनों की पहचान बहुत मुश्किल हो रही है।
आए दिन टीवी के समाचारों में, समाचार पत्रों में, सोशल मीडिया के न्यूज फीड के दौर में नजदीकी बंधन के रिश्तों में भी असंतोष व गहरी साजिशों के होने का समावेश दिख रहा है, जहाँ नैतिक कर्तव्यों, परिवार के बंधन व सामाजिक बुनियादों को दरकिनार कर लोग अपराधी भी बन रहे हैं।
वहीं अपनों के साथ लालच व ग्रिड आकर लोग रोजमर्रे के जीवन में तमाम खेल भी खेल रहे हैं, जो अपनों के बीच भारी असंतोष व रिश्तों में विश्वसनीयता को कम कर रहा है।
वहीं समाज किसी भी अप्रत्याशित घटना पर आश्चर्य व्यक्त न करते हुए सहमति दिखाते हुए दिखाई दे रहा है।

यूँ तो ज़िंदगी में बहुत कुछ सीखने को मिलता है — पढ़ाई के समय, काम-काज के समय में, चलना-बोलना के समय, सामाजिक रहन-सहन में, निकट नजदीकी लोगों के व्यवहार के समय में बहुत ही अनुभव खुद ब खुद मिलता है, लेकिन आज के दौर में एक चीज़ सबसे ज़रूरी है?
वह है लोगों को पहचानना।
क्योंकि हर कोई आदमी, उसका व्यवहार, रिश्तों में निकट संबंधों में जो अच्छा दिखता है, जरूरी नहीं कि वह अच्छा ही हो।
इसीलिए मैं अपने सामाजिक रहन-सहन व कार्य के अनुभवों के आधार पर यह कहना चाहता हूँ —
“ज़िंदगी में चाहे कुछ सीखो या मत सीखो, लेकिन लोगों को पहचानने की कला ज़रूर सीखो।”
असल में शुभचिंतक कौन होता है?
शुभचिंतक मतलब — जो आपका भला चाहता है।
वो आपके साथ तब भी खड़ा रहता है, जब सब दूर हो जाते हैं।
वो आपके लिए बुराई नहीं, भलाई सोचता है — बिना किसी मतलब के।
जब आप मुश्किल में हों, वो पास हो — जैसे अगर बीमारी हो गई, पैसा नहीं है, दुख आ गया — तो जो बिना कहे आपका साथ दे, वही अपना है।
जो आपकी बुराई नहीं, भलाई के लिए डांटे, अगर आप कोई गलती कर रहे हो, तो जो मीठा बोलने के बजाय आपको समझाए और सही रास्ता दिखाए — वही सच्चा दोस्त है।
जो बिना मतलब के भी आपको याद करे, अगर कोई हर समय आपके काम से ही आपको याद करे — तो वह मतलब का आदमी है, लेकिन जो बिना किसी कारण हालचाल पूछे — वह दिल से जुड़ा है।
आपकी खुशी में सच में खुश हो जाए, जो आपके आगे बढ़ने पर तरक्की में जलता है, पीठ पीछे बातें बनाता हो, लोगों के बीच बिना मतलब नेगेटिविटी फैलाता हो, वो कभी शुभचिंतक नहीं हो सकता।
सच्चा शुभचिंतक तो आपकी सफलता में तालियाँ बजाता है।
आपकी पीठ पीछे भी आपकी इज्जत करता है, असली साथी वही होता है जो सामने ही नहीं, बल्कि आपकी गैरहाजिरी में भी आपकी तारीफ करे।
कोई कमी हो तो उसपर सामने चर्चा करें, उसको सही करने का प्रयास आपके साथ मिलकर करें।
किससे बचना चाहिए?
अथवा कैसे लोगों से बचना चाहिए:
जो सिर्फ अपने फायदे के लिए आपके पास आता है, कोई काम हो तब ही याद करता है, कितने लोग आपको जीवन में मिलेंगे जो आपके जीवन में रोजमर्रे का हिस्सा होंगे, लेकिन जब भी आप संकट में होंगे, वह सबसे पहले आपकी मीन-मेख निकालेंगे, बोलेंगे, "हम तो इसको बहुत दिन से जानते हैं, यह ऐसा ही है।"
वह आपका रोज का मित्र सबसे पहले दूसरे लोगों के बीच आपकी साख को तार-तार व चूर-चूर कर देगा, जो दूसरों की बुराई करके आपके पास आपकी वाहवाही लेना जानता हो, वह आपकी भी कहीं बुराई कर वाहवाही जरूर लेगा — यह तय है।
जो आपके दुःख में मुँह फेर ले, जब संकट हो तो दूरी बनाए,
जो आपकी मदद करके हर किसी को बताता फिरता है, ऐसे तमाम व्यवहार की गूढ़ बातें हैं जो यह व्यक्त करते हैं कि हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता, और हर चुप रहने वाला दुश्मन भी नहीं होता।
हर किसी के ज़िंदगी में समय सबसे अच्छा व्यक्ति परीक्षक होता है -वक्त आने पर सबकी असलियत समय आपके सामने ला ही देता है।
लेकिन इस दुनिया व समाज में अपने लोग भी हैं जो संबंधों को दूर रहकर भी निभाते हैं ,जो हर दुःख में साथ देते हैं, सुख में हर्षोल्लास में आनंद के समय उसमे और वृद्धि करते हैं —अब ऐसे लोग को भी पहचाने जो सच्चे हितैषी हैं —
“जो दुख में साथ दे, जो सच मुँह पर कहे, जो आपका हर समय हर हालात में शुभ की ही बात करें, जो बिना स्वार्थ के मदद करें— वही या ऐसे ही लोग असली शुभचिंतक होते हैं।”

नकली फर्जी रिस्तो से दूरी बनाइये एवं सच्चे इस्ट मित्र व नात रिश्तेदारों व अपने परिवार के साथ जीवन का आनंद लीजिए।

✍🏻दुर्गेश सिंह

          police
17/07/2024


police

नव निर्मित भवन चौकी कलक्ट्रेट के उद्घटान के कुछ सुनहरे पल
16/07/2023

नव निर्मित भवन चौकी कलक्ट्रेट के उद्घटान के कुछ सुनहरे पल

26 जनवरी 🍁🌼👮
26/01/2023

26 जनवरी 🍁🌼👮

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