06/07/2025
"असली शुभचिंतक ,
हितैषी कौन आदमी होता है?
पहचान कैसे करें ?"
जीवन में आजकल के इस स्वार्थ परक समाज में बहुत आवश्यक है कि जब लोग निकट संबंधी व नात रिश्तेदारों का प्रयोग भी स्वार्थ हित में खुलकर करते हैं ,
कर रहे है - तब समय बहुत ही सतर्क होने का है।
लाभ-हानि के आंकड़े से परख कर स्वचलित रिश्तों में आजकल अपनों की पहचान बहुत मुश्किल हो रही है।
आए दिन टीवी के समाचारों में, समाचार पत्रों में, सोशल मीडिया के न्यूज फीड के दौर में नजदीकी बंधन के रिश्तों में भी असंतोष व गहरी साजिशों के होने का समावेश दिख रहा है, जहाँ नैतिक कर्तव्यों, परिवार के बंधन व सामाजिक बुनियादों को दरकिनार कर लोग अपराधी भी बन रहे हैं।
वहीं अपनों के साथ लालच व ग्रिड आकर लोग रोजमर्रे के जीवन में तमाम खेल भी खेल रहे हैं, जो अपनों के बीच भारी असंतोष व रिश्तों में विश्वसनीयता को कम कर रहा है।
वहीं समाज किसी भी अप्रत्याशित घटना पर आश्चर्य व्यक्त न करते हुए सहमति दिखाते हुए दिखाई दे रहा है।
यूँ तो ज़िंदगी में बहुत कुछ सीखने को मिलता है — पढ़ाई के समय, काम-काज के समय में, चलना-बोलना के समय, सामाजिक रहन-सहन में, निकट नजदीकी लोगों के व्यवहार के समय में बहुत ही अनुभव खुद ब खुद मिलता है, लेकिन आज के दौर में एक चीज़ सबसे ज़रूरी है?
वह है लोगों को पहचानना।
क्योंकि हर कोई आदमी, उसका व्यवहार, रिश्तों में निकट संबंधों में जो अच्छा दिखता है, जरूरी नहीं कि वह अच्छा ही हो।
इसीलिए मैं अपने सामाजिक रहन-सहन व कार्य के अनुभवों के आधार पर यह कहना चाहता हूँ —
“ज़िंदगी में चाहे कुछ सीखो या मत सीखो, लेकिन लोगों को पहचानने की कला ज़रूर सीखो।”
असल में शुभचिंतक कौन होता है?
शुभचिंतक मतलब — जो आपका भला चाहता है।
वो आपके साथ तब भी खड़ा रहता है, जब सब दूर हो जाते हैं।
वो आपके लिए बुराई नहीं, भलाई सोचता है — बिना किसी मतलब के।
जब आप मुश्किल में हों, वो पास हो — जैसे अगर बीमारी हो गई, पैसा नहीं है, दुख आ गया — तो जो बिना कहे आपका साथ दे, वही अपना है।
जो आपकी बुराई नहीं, भलाई के लिए डांटे, अगर आप कोई गलती कर रहे हो, तो जो मीठा बोलने के बजाय आपको समझाए और सही रास्ता दिखाए — वही सच्चा दोस्त है।
जो बिना मतलब के भी आपको याद करे, अगर कोई हर समय आपके काम से ही आपको याद करे — तो वह मतलब का आदमी है, लेकिन जो बिना किसी कारण हालचाल पूछे — वह दिल से जुड़ा है।
आपकी खुशी में सच में खुश हो जाए, जो आपके आगे बढ़ने पर तरक्की में जलता है, पीठ पीछे बातें बनाता हो, लोगों के बीच बिना मतलब नेगेटिविटी फैलाता हो, वो कभी शुभचिंतक नहीं हो सकता।
सच्चा शुभचिंतक तो आपकी सफलता में तालियाँ बजाता है।
आपकी पीठ पीछे भी आपकी इज्जत करता है, असली साथी वही होता है जो सामने ही नहीं, बल्कि आपकी गैरहाजिरी में भी आपकी तारीफ करे।
कोई कमी हो तो उसपर सामने चर्चा करें, उसको सही करने का प्रयास आपके साथ मिलकर करें।
किससे बचना चाहिए?
अथवा कैसे लोगों से बचना चाहिए:
जो सिर्फ अपने फायदे के लिए आपके पास आता है, कोई काम हो तब ही याद करता है, कितने लोग आपको जीवन में मिलेंगे जो आपके जीवन में रोजमर्रे का हिस्सा होंगे, लेकिन जब भी आप संकट में होंगे, वह सबसे पहले आपकी मीन-मेख निकालेंगे, बोलेंगे, "हम तो इसको बहुत दिन से जानते हैं, यह ऐसा ही है।"
वह आपका रोज का मित्र सबसे पहले दूसरे लोगों के बीच आपकी साख को तार-तार व चूर-चूर कर देगा, जो दूसरों की बुराई करके आपके पास आपकी वाहवाही लेना जानता हो, वह आपकी भी कहीं बुराई कर वाहवाही जरूर लेगा — यह तय है।
जो आपके दुःख में मुँह फेर ले, जब संकट हो तो दूरी बनाए,
जो आपकी मदद करके हर किसी को बताता फिरता है, ऐसे तमाम व्यवहार की गूढ़ बातें हैं जो यह व्यक्त करते हैं कि हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता, और हर चुप रहने वाला दुश्मन भी नहीं होता।
हर किसी के ज़िंदगी में समय सबसे अच्छा व्यक्ति परीक्षक होता है -वक्त आने पर सबकी असलियत समय आपके सामने ला ही देता है।
लेकिन इस दुनिया व समाज में अपने लोग भी हैं जो संबंधों को दूर रहकर भी निभाते हैं ,जो हर दुःख में साथ देते हैं, सुख में हर्षोल्लास में आनंद के समय उसमे और वृद्धि करते हैं —अब ऐसे लोग को भी पहचाने जो सच्चे हितैषी हैं —
“जो दुख में साथ दे, जो सच मुँह पर कहे, जो आपका हर समय हर हालात में शुभ की ही बात करें, जो बिना स्वार्थ के मदद करें— वही या ऐसे ही लोग असली शुभचिंतक होते हैं।”
नकली फर्जी रिस्तो से दूरी बनाइये एवं सच्चे इस्ट मित्र व नात रिश्तेदारों व अपने परिवार के साथ जीवन का आनंद लीजिए।
✍🏻दुर्गेश सिंह