25/05/2026
ओशो लोकतंत्र को 'भीड़ का शासन' कहते थे।
उनका तर्क था कि यदि देश की अधिकांश जनता अचेतन,
अशिक्षित या मानसिक रूप से परिपक्व नहीं है,
तो वह कभी भी एक सही और बुद्धिमान नेता का चुनाव नहीं कर सकती।