18/10/2025
दोस्त की माँ, बुआ और बहन की -2⬇️
रास्ते में मैंने बीयर की दुकान से बीयर की बोतलें ले आया. घर आकर हाथ पैर धोकर केवल लुंगी पहन कर दूसरे कमरे में जाकर बीयर पीने लगा. एक घण्टे में मैंने 4 बोतलें बीयर पी ली थी और बीयर का नशा हावी होने लगा था. इतने में बुआ जी ने खाने के लिए आवाज लगाईं. हम सब साथ बैठ कर खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद मैं सिगरेट की दुकान जाकर सिगरेट पीने लगा.
जब वापस आया तो आँगन में सब बैठ कर बाते कर रहे थे. मैं भी उनकी बातों में शामिल हो गया और हंसी मजाक करने लगा.
बातों बातों में बुआ जी माँ से बोलीं, भाभी- दीनू बेटा अच्छी मालिश करता है. आज खेत में काम करते करते, अचानक! मेरी कमर में दर्द उठा तो इसने अच्छी मालिश की और कुछ ही देर में मुझे आराम आ गया.
माँ हंस पड़ी और मेरी तरफ़ अजीब नज़रो से देखने लगीं. मैं कुछ नहीं कहा और सिर झुका लिया.
आधे घण्टे के बाद बहन और बुआ सोने चली गईं. मैं और माँ इधर उधर की बातें करते रहे. करीब रात 11 बजे माँ बोली, बता आज तो! मेरे पैर दुख रहे हैं. क्या तुम मालिश कर दोगे?
दीनू: हाँ, क्यों नहीं! लेकिन आप केवल सूखी मालिश करवाओगी या तेल लगाकर?
मा: बेटा अगर तेल लगा कर करोगे तो आसानी होगी और आराम भी मिलेगा!
दीनू : ठीक है! लेकिन सरसो का तेल हो तो और भी अच्छा रहेगा और जल्दी आराम मिलेगा
फिर माँ उठ कर अपने कमरे में गईं और, मुझे भी अपने कमरे में बुला लिया. मैंने कहा, आप चलिए मैं पेशाब करके आता हूँ.
मैं जब पेशाब करके उनके कमरे में गया तो देखा माँ अपनी साड़ी खोल रही थी.
मुझे देख कर बोली, बेटा तेल के दाग साड़ी पर ना लगे इसलिए साड़ी उतार रही हूँ. वो अब केवल ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थी और मैं बनियान और लुंगी में था.
माँ ने तेल की शीशी मुझे देकर बिस्तर पर लेट गईं. मैं भी उनके पैर के पास बैठ कर उनके पैर से थोड़ा पेटीकोट ऊपर किया और तेल लगा कर मालिश करने लगा.
माँ बोली, बेटा बड़ा आराम आ रहा है! जरा पिंडली में जोर लगा कर मालिश करो. मैंने फिर उनका दायाँ पैर अपने कंधे में रख कर पिंडली में मालिश करने लगा.
उनका एक पैर मेरे कंधे पर था और दूसरा नीचे था, जिस कारण मुझे उनकी गुफा के दर्शन हो रहे थे क्योंकि माँ ने अन्दर पैन्टी नहीं पहनी थी.
वैसे भी देहाती लोग ब्रा और पैन्टी नहीं पहनते हैं! उनकी गुफा के दर्शन पाते ही मेरा हरकत करने लगा.
माँ ने अपनी पेटीकोट घुटनों के थोड़ा ऊपर कर के कहा, जरा और ऊपर मालिश करो.
मैं अब पिंडली के ऊपर मालिश करने लगा, और उनका पेटीकोट घुटनों के थोड़ा ऊपर होने के कारण अब मुझे उनकी गुफा साफ़ दिखाई दे रही थी.
इस कारण मेरा फूल कर लोहे की तरह और सख्त हो गया, और चड्डी फ़ाड़ कर निकलने को बेताब हो रहा था
मैं थोड़ा थोड़ा ऊपर मालिश करने लगा और मालिश करते करते मेरी उंगलियाँ कभी-कभी उनकी जाँघों के पास चली जाती थी.
जब भी मेरी उंगलियाँ उनके जाँघों को स्पर्श करती तो, उनके मुख से आवाज निकलती थी.
मैंने उनकी ओर देखा तो माँ की आँखें बंद थी और बार बार वो अपने होंठों पर अपनी जीभ फेर रही थीं
मैंने सोचा! कि, मेरी उंगलियों के स्पर्श से माँ को मजा आ रहा है. क्यों ना इस सुनहरे मौके का फ़ायदा उठाया जाए!
मैने माँ से कहा, माँ मेरे हाथ तेल की चिकनाहट के कारण काफ़ी फिसल रहे है. यदि आप को अच्छा नहीं लगता है तो मालिश बंद कर दूँ?
माँ ने कहा, कोई बात नहीं मुझे काफ़ी आराम और सुख मिल रहा है. फिर मैं अपने हथेली पर और तेल लगा कर उनके घुटनों के ऊपर मालिश करने लगा.
मालिश करते करते अचानक! मेरी उंगलियाँ उनके गुफा के इलाके के पास छूने को होने लगी. वो आँखें बंद कर के केवल आहें भर रही थीं.
मेरी उंगलियाँ उनके पेटीकोट के अन्दर गुफा को छूने की कोशिश कर रही थी.
अचानक! मेरी उँगली उनके गुफा को छू लिया, फिर मैं थोड़ा घबरा कर अपनी उँगली उनके गुफा से हटा ली और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके चेहरे की ओर देखा लेकिन माँ की आँखें बंद थी.
वो कुछ नहीं बोल रही थीं. मेरा सख्त होकर चड्डी के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था.
मैंने माँ से कहा, माँ मुझे पेशाब लगी है. मैं पेशाब करके आता हूँ फ़िर मालिश करुगा.
माँ बोली, ठीक है! बेटा वाकयी तू बहुत अच्छा मालिश करता है. मन करता है मैं रात भर तुझसे मालिश करवाऊँ.
मैं बोला, कोई बात नहीं! आप जब तक कहोगी मैं मालिश करुँगा यह कह कर मैं पेशाब करने चला गया.
जब पेशाब करके वापस आ रहा था तो, बुआ जी के कमरे से मुझे कुछ कुछ आवाज सुनाई दी. उत्सुकता से मैंने खिड़की की ओर देखा तो वह थोड़ी खुली थी.
मैंने खिड़की से देखा, बुआ जी एकदम नंगी सोईं थीं और अपने गुफा में ककड़ी डाल कर ककड़ी को अन्दर बाहर कर रही थीं और मुख से आवाज निकाल रही थीं.
यह सीन देख कर! मेरा फिर खड़ा हो गया. मैंने सोचा, बुआ जी की मालिश कल करुँगा आज सुखबिंदर की माँ की मालिश करता हूँ क्योंकि, तवा गर्म है तो रोटी सेक लेनी चाहिए.
मैं फिर माँ के कमरे में चला गया.
मुझे आया देख कर माँ ने कहा, बेटा लाईट बुझा कर धीमी लाईट जला दो ताकि मालिश करवाते करवाते अगर मुझे नींद आ गई तो तुम भी मेरे बगल में सो जाना.
मैंने तब लाईट बंद करके धीमी लाईट चालू कर दी जब वापास आया तो, माँ पेट के बल लेटी थीं और उनका पेटीकोट केवल उनकी भारी भारी हिप के ऊपर था बाकी पैरों का हिस्सा बिल्कुल नंगा था.
अब मैं हथेली पर ढेर सारा तेल लगा कर उनके पैरों की मालिश करने लगा. पहले पिंडली पर मालिश करता रहा फिर, मैं धीरे धीरे घुटनों के ऊपर जाँघों के पास हिप के नीचे मालिश करता रहा.
पेटीकोट हिप पर होने से मुझे उनकी हिप का छेद नज़र आ रहा था. अब मैं हिम्मत कर के धीरे धीरे उनका पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया.
माँ कुछ नहीं बोली और उनकी आँखें बंद थी.
मैंने सोचा! शायद उनको नींद आ गई होगी. अब उनकी हिप और गुफा के बाल मुझे साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे.
मैंने हिम्मत करके तेल से भरी हुई उँगली उनकी हिप के छेद के ऊपर लगाने लगा वो कुछ नहीं बोलीं. मेरी हिम्मत और बढ़ गई.
मेरा अँगूठा उनकी गुफा की फांकों को छू रहा था और, अँगूठे की बगल की उँगली उनकी हिप के छेद को सहला रही थी.
यह सब हरकत करते करते मेरा टाईट हो गया और गुफा में घुसने के लिए बेताब हो गया.
इतने में माँ ने कहा कि, बेटा मेरी कमर पर भी मालिश कर दो, तब मैं उठकर पहले चुपके से मेरी चड्डी उतार कर उनकी कमर पर मालिश करने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने माँ से कहा कि, माँ तेल से आप का ब्लाऊज़ खराब हो जाएगा. क्या आप अपने ब्लाऊज़ को थोड़ा ऊपर उठा सकती हैं?
यह सुनकर, माँ ने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुए ब्लाऊज़ को ऊपर उठा दिया. मैं फिर मालिश करने लगा. मालिश करते करते कभी कभी मेरी हथेली साईड से उनके संतरो को छू जाती थी.
उनकी कोई भी प्रतिक्रिया ना देख कर मैंने उनसे कहा, माँ अब आप सीधी सो जाइए. मैं अब आपकी स्पेशल तरीके से मालिश करना चाहता हूँ. माँ करवट बदल कर सीधी हो गईं.
मैंने देखा! अब भी उनकी आँखें बंद थी और उनके ब्लाऊज़ के सारे बटन खुले थे और, उनकी संतरे साफ़ झलक रही थी.
उनकी संतरे काफ़ी बड़ी बड़ी थी और साँसों से साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसीली संतरे साफ़ साफ़ दिख रही थी.
माँ की सुरीली और नशीली धीमी आवाज मेरे कानो में पड़ी- बेटा अब तुम थक गए होगे, यहाँ आओ ना! और मेरे पास ही लेट जाओ ना.
पहले तो मैं हिचकिचाया क्योंकि, मैंने केवल लुंगी पहनी थी और लुंगी के अन्दर मेरा गुफा के लिए तड़प रहा था.
वो मेरी परेशानी समझ गई और बोलीं- कोई बात नही, तुम अपनी बनियान उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ! शरमाओ मत, आओ ना
मुझे अपने कान पर यकीन नहीं हो रहा था. मैं बनियान उतार कर उनके पास लेट गया और जिस बदन को कभी दूर से निहारता था आज, मैं उसी के पास लेटा हुआ था.
माँ का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था कि, उनकी संतरे बिल्कुल नंगी दिखाई दे रही थी, क्या हसीन नजारा था!
तब माँ बोली- इतने महीने से आज मालिश करवाई हूँ, इसलिए काफ़ी आराम मिला है!
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींच कर अपनी उभरी हुई संतरो पर रख दिया और मैं कुछ नहीं बोल पाया. लेकिन अपना हाथ उनके संतरो पर रखा रहने दिया.
मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, जरा सहलाओ ना.
मैंने उनकी संतरो को सहलाना शुरु किया और कभी कभी जोर जोर से, उनकी संतरो को रगड़ना शुरु कर दिया.
मेरी हथेली की रगड़ पा कर माँ के निप्पल कड़े हो गए. अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ़ घूमा कर बोलीं- बेटा मेरा ब्लाऊज़ खोल दो और ठीक से सहलाओ.
मैंने काँपते हुए हाथों से माँ का ब्लाऊज़ खोल दिया और उन्होंने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दिया.
मेरे दोनों हाथों को अपने नंगी संतरो पर ले जाकर वो बोली- थोड़ा कस कर दबाओ ना! मैं भी काफ़ी उत्तेजित हो गया और, जोश में आकर उनकी रसीली संतरो से जम कर खेलने लगा.
क्या बड़ी-बड़ी संतरे थी! कड़ी कड़ी संतरे और लम्बे लम्बे निप्पल्स. पहली बार मैं किसी औरत की संतरो को छू रहा था.
माँ को भी मुझसे अपनी संतरो की मालिश करवाने में मज़ा आ रहा था.
मेरा अब खड़ा होने लगा था और लुंगी से बाहर निकल आया. मेरा पूरे जोश में आ गया था.
माँ की संतरे मसलते मसलते हुए, मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा उनकी जाँघों में रगड़ मारने लगा था.
अब उन्होंने कहा- बेटा तुम्हारा तो लोहे के समान हो गया है और इसका स्पर्श से लगता है कि काफ़ी लम्बा और मोटा होगा. क्या मैं हाथ लगा कर देखूँ?
उन्होंने पूछा, और मेरे जवाब देने से पहले अपना हाथ मेरे सामान पर रख कर उसको टटोलने लगी.
अपनी मुठ्ठी मेरे सामान पर कस के बंद कर ली और बोली- बाप रे! ये तो बहुत कड़क है. वो मेरी तरफ़ घूमी और अपना हाथ मेरी लुंगी मे घुसा कर मेरे फ़ड़फ़ड़ाते हुए सामान को पकड़ लिया.
सामान को कस कर पकड़े हुए वो अपना हाथ सामान के जड़ तक ले गई, जिससे सुपाड़ा बाहर आ गया. सुपाड़े की साईज और आकार देख कर वो बहुत हैरान हो गईं.
बेटा कहाँ छुपा रखा था? ऐसा तो मैंने अपनी जिन्दगी में नहीं देखा है! उन्होंने पूछा.
मैंने कहा- यहीं तो था, तुम्हारे सामने लेकिन तुमने ध्यान ही नहीं दिया. यदि आप ट्रेन में गहरी नींद में नहीं होतीं तो शायद आप देख लेतीं क्योंकि ट्रेन में रात को मेरा सुपाड़ा आप की गुफा को रगड़ रहा था.
माँ बोली- मुझे क्या पता था कि, तुम्हारा इतना बड़ा होगा! ये मैं सोच भी नहीं सकती थी.
मुझे उनकी बिन्दास बोली पर आश्चर्य! हुआ जब उन्होंने, कहा और साथ ही में बड़ा मज़ा अया.