Priya bhabhi ki Kahani

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दोस्त की माँ, बुआ और बहन की -2⬇️रास्ते में मैंने बीयर की दुकान से बीयर की बोतलें ले आया. घर आकर हाथ पैर धोकर केवल लुंगी ...
18/10/2025

दोस्त की माँ, बुआ और बहन की -2⬇️
रास्ते में मैंने बीयर की दुकान से बीयर की बोतलें ले आया. घर आकर हाथ पैर धोकर केवल लुंगी पहन कर दूसरे कमरे में जाकर बीयर पीने लगा. एक घण्टे में मैंने 4 बोतलें बीयर पी ली थी और बीयर का नशा हावी होने लगा था. इतने में बुआ जी ने खाने के लिए आवाज लगाईं. हम सब साथ बैठ कर खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद मैं सिगरेट की दुकान जाकर सिगरेट पीने लगा.
जब वापस आया तो आँगन में सब बैठ कर बाते कर रहे थे. मैं भी उनकी बातों में शामिल हो गया और हंसी मजाक करने लगा.
बातों बातों में बुआ जी माँ से बोलीं, भाभी- दीनू बेटा अच्छी मालिश करता है. आज खेत में काम करते करते, अचानक! मेरी कमर में दर्द उठा तो इसने अच्छी मालिश की और कुछ ही देर में मुझे आराम आ गया.

माँ हंस पड़ी और मेरी तरफ़ अजीब नज़रो से देखने लगीं. मैं कुछ नहीं कहा और सिर झुका लिया.
आधे घण्टे के बाद बहन और बुआ सोने चली गईं. मैं और माँ इधर उधर की बातें करते रहे. करीब रात 11 बजे माँ बोली, बता आज तो! मेरे पैर दुख रहे हैं. क्या तुम मालिश कर दोगे?
दीनू: हाँ, क्यों नहीं! लेकिन आप केवल सूखी मालिश करवाओगी या तेल लगाकर?
मा: बेटा अगर तेल लगा कर करोगे तो आसानी होगी और आराम भी मिलेगा!
दीनू : ठीक है! लेकिन सरसो का तेल हो तो और भी अच्छा रहेगा और जल्दी आराम मिलेगा
फिर माँ उठ कर अपने कमरे में गईं और, मुझे भी अपने कमरे में बुला लिया. मैंने कहा, आप चलिए मैं पेशाब करके आता हूँ.
मैं जब पेशाब करके उनके कमरे में गया तो देखा माँ अपनी साड़ी खोल रही थी.
मुझे देख कर बोली, बेटा तेल के दाग साड़ी पर ना लगे इसलिए साड़ी उतार रही हूँ. वो अब केवल ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थी और मैं बनियान और लुंगी में था.

माँ ने तेल की शीशी मुझे देकर बिस्तर पर लेट गईं. मैं भी उनके पैर के पास बैठ कर उनके पैर से थोड़ा पेटीकोट ऊपर किया और तेल लगा कर मालिश करने लगा.
माँ बोली, बेटा बड़ा आराम आ रहा है! जरा पिंडली में जोर लगा कर मालिश करो. मैंने फिर उनका दायाँ पैर अपने कंधे में रख कर पिंडली में मालिश करने लगा.
उनका एक पैर मेरे कंधे पर था और दूसरा नीचे था, जिस कारण मुझे उनकी गुफा के दर्शन हो रहे थे क्योंकि माँ ने अन्दर पैन्टी नहीं पहनी थी.
वैसे भी देहाती लोग ब्रा और पैन्टी नहीं पहनते हैं! उनकी गुफा के दर्शन पाते ही मेरा हरकत करने लगा.

माँ ने अपनी पेटीकोट घुटनों के थोड़ा ऊपर कर के कहा, जरा और ऊपर मालिश करो.
मैं अब पिंडली के ऊपर मालिश करने लगा, और उनका पेटीकोट घुटनों के थोड़ा ऊपर होने के कारण अब मुझे उनकी गुफा साफ़ दिखाई दे रही थी.
इस कारण मेरा फूल कर लोहे की तरह और सख्त हो गया, और चड्डी फ़ाड़ कर निकलने को बेताब हो रहा था
मैं थोड़ा थोड़ा ऊपर मालिश करने लगा और मालिश करते करते मेरी उंगलियाँ कभी-कभी उनकी जाँघों के पास चली जाती थी.
जब भी मेरी उंगलियाँ उनके जाँघों को स्पर्श करती तो, उनके मुख से आवाज निकलती थी.
मैंने उनकी ओर देखा तो माँ की आँखें बंद थी और बार बार वो अपने होंठों पर अपनी जीभ फेर रही थीं
मैंने सोचा! कि, मेरी उंगलियों के स्पर्श से माँ को मजा आ रहा है. क्यों ना इस सुनहरे मौके का फ़ायदा उठाया जाए!
मैने माँ से कहा, माँ मेरे हाथ तेल की चिकनाहट के कारण काफ़ी फिसल रहे है. यदि आप को अच्छा नहीं लगता है तो मालिश बंद कर दूँ?
माँ ने कहा, कोई बात नहीं मुझे काफ़ी आराम और सुख मिल रहा है. फिर मैं अपने हथेली पर और तेल लगा कर उनके घुटनों के ऊपर मालिश करने लगा.
मालिश करते करते अचानक! मेरी उंगलियाँ उनके गुफा के इलाके के पास छूने को होने लगी. वो आँखें बंद कर के केवल आहें भर रही थीं.
मेरी उंगलियाँ उनके पेटीकोट के अन्दर गुफा को छूने की कोशिश कर रही थी.

अचानक! मेरी उँगली उनके गुफा को छू लिया, फिर मैं थोड़ा घबरा कर अपनी उँगली उनके गुफा से हटा ली और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके चेहरे की ओर देखा लेकिन माँ की आँखें बंद थी.
वो कुछ नहीं बोल रही थीं. मेरा सख्त होकर चड्डी के बाहर निकलने को बेताब हो रहा था.
मैंने माँ से कहा, माँ मुझे पेशाब लगी है. मैं पेशाब करके आता हूँ फ़िर मालिश करुगा.
माँ बोली, ठीक है! बेटा वाकयी तू बहुत अच्छा मालिश करता है. मन करता है मैं रात भर तुझसे मालिश करवाऊँ.
मैं बोला, कोई बात नहीं! आप जब तक कहोगी मैं मालिश करुँगा यह कह कर मैं पेशाब करने चला गया.

जब पेशाब करके वापस आ रहा था तो, बुआ जी के कमरे से मुझे कुछ कुछ आवाज सुनाई दी. उत्सुकता से मैंने खिड़की की ओर देखा तो वह थोड़ी खुली थी.
मैंने खिड़की से देखा, बुआ जी एकदम नंगी सोईं थीं और अपने गुफा में ककड़ी डाल कर ककड़ी को अन्दर बाहर कर रही थीं और मुख से आवाज निकाल रही थीं.
यह सीन देख कर! मेरा फिर खड़ा हो गया. मैंने सोचा, बुआ जी की मालिश कल करुँगा आज सुखबिंदर की माँ की मालिश करता हूँ क्योंकि, तवा गर्म है तो रोटी सेक लेनी चाहिए.

मैं फिर माँ के कमरे में चला गया.
मुझे आया देख कर माँ ने कहा, बेटा लाईट बुझा कर धीमी लाईट जला दो ताकि मालिश करवाते करवाते अगर मुझे नींद आ गई तो तुम भी मेरे बगल में सो जाना.
मैंने तब लाईट बंद करके धीमी लाईट चालू कर दी जब वापास आया तो, माँ पेट के बल लेटी थीं और उनका पेटीकोट केवल उनकी भारी भारी हिप के ऊपर था बाकी पैरों का हिस्सा बिल्कुल नंगा था.
अब मैं हथेली पर ढेर सारा तेल लगा कर उनके पैरों की मालिश करने लगा. पहले पिंडली पर मालिश करता रहा फिर, मैं धीरे धीरे घुटनों के ऊपर जाँघों के पास हिप के नीचे मालिश करता रहा.
पेटीकोट हिप पर होने से मुझे उनकी हिप का छेद नज़र आ रहा था. अब मैं हिम्मत कर के धीरे धीरे उनका पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया.

माँ कुछ नहीं बोली और उनकी आँखें बंद थी.
मैंने सोचा! शायद उनको नींद आ गई होगी. अब उनकी हिप और गुफा के बाल मुझे साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे.
मैंने हिम्मत करके तेल से भरी हुई उँगली उनकी हिप के छेद के ऊपर लगाने लगा वो कुछ नहीं बोलीं. मेरी हिम्मत और बढ़ गई.
मेरा अँगूठा उनकी गुफा की फांकों को छू रहा था और, अँगूठे की बगल की उँगली उनकी हिप के छेद को सहला रही थी.
यह सब हरकत करते करते मेरा टाईट हो गया और गुफा में घुसने के लिए बेताब हो गया.
इतने में माँ ने कहा कि, बेटा मेरी कमर पर भी मालिश कर दो, तब मैं उठकर पहले चुपके से मेरी चड्डी उतार कर उनकी कमर पर मालिश करने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने माँ से कहा कि, माँ तेल से आप का ब्लाऊज़ खराब हो जाएगा. क्या आप अपने ब्लाऊज़ को थोड़ा ऊपर उठा सकती हैं?
यह सुनकर, माँ ने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुए ब्लाऊज़ को ऊपर उठा दिया. मैं फिर मालिश करने लगा. मालिश करते करते कभी कभी मेरी हथेली साईड से उनके संतरो को छू जाती थी.
उनकी कोई भी प्रतिक्रिया ना देख कर मैंने उनसे कहा, माँ अब आप सीधी सो जाइए. मैं अब आपकी स्पेशल तरीके से मालिश करना चाहता हूँ. माँ करवट बदल कर सीधी हो गईं.

मैंने देखा! अब भी उनकी आँखें बंद थी और उनके ब्लाऊज़ के सारे बटन खुले थे और, उनकी संतरे साफ़ झलक रही थी.
उनकी संतरे काफ़ी बड़ी बड़ी थी और साँसों से साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसीली संतरे साफ़ साफ़ दिख रही थी.
माँ की सुरीली और नशीली धीमी आवाज मेरे कानो में पड़ी- बेटा अब तुम थक गए होगे, यहाँ आओ ना! और मेरे पास ही लेट जाओ ना.
पहले तो मैं हिचकिचाया क्योंकि, मैंने केवल लुंगी पहनी थी और लुंगी के अन्दर मेरा गुफा के लिए तड़प रहा था.
वो मेरी परेशानी समझ गई और बोलीं- कोई बात नही, तुम अपनी बनियान उतार दो और रोज जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ! शरमाओ मत, आओ ना
मुझे अपने कान पर यकीन नहीं हो रहा था. मैं बनियान उतार कर उनके पास लेट गया और जिस बदन को कभी दूर से निहारता था आज, मैं उसी के पास लेटा हुआ था.
माँ का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था कि, उनकी संतरे बिल्कुल नंगी दिखाई दे रही थी, क्या हसीन नजारा था!
तब माँ बोली- इतने महीने से आज मालिश करवाई हूँ, इसलिए काफ़ी आराम मिला है!
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींच कर अपनी उभरी हुई संतरो पर रख दिया और मैं कुछ नहीं बोल पाया. लेकिन अपना हाथ उनके संतरो पर रखा रहने दिया.

मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, जरा सहलाओ ना.
मैंने उनकी संतरो को सहलाना शुरु किया और कभी कभी जोर जोर से, उनकी संतरो को रगड़ना शुरु कर दिया.
मेरी हथेली की रगड़ पा कर माँ के निप्पल कड़े हो गए. अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ़ घूमा कर बोलीं- बेटा मेरा ब्लाऊज़ खोल दो और ठीक से सहलाओ.
मैंने काँपते हुए हाथों से माँ का ब्लाऊज़ खोल दिया और उन्होंने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दिया.
मेरे दोनों हाथों को अपने नंगी संतरो पर ले जाकर वो बोली- थोड़ा कस कर दबाओ ना! मैं भी काफ़ी उत्तेजित हो गया और, जोश में आकर उनकी रसीली संतरो से जम कर खेलने लगा.
क्या बड़ी-बड़ी संतरे थी! कड़ी कड़ी संतरे और लम्बे लम्बे निप्पल्स. पहली बार मैं किसी औरत की संतरो को छू रहा था.
माँ को भी मुझसे अपनी संतरो की मालिश करवाने में मज़ा आ रहा था.
मेरा अब खड़ा होने लगा था और लुंगी से बाहर निकल आया. मेरा पूरे जोश में आ गया था.
माँ की संतरे मसलते मसलते हुए, मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा उनकी जाँघों में रगड़ मारने लगा था.

अब उन्होंने कहा- बेटा तुम्हारा तो लोहे के समान हो गया है और इसका स्पर्श से लगता है कि काफ़ी लम्बा और मोटा होगा. क्या मैं हाथ लगा कर देखूँ?
उन्होंने पूछा, और मेरे जवाब देने से पहले अपना हाथ मेरे सामान पर रख कर उसको टटोलने लगी.
अपनी मुठ्ठी मेरे सामान पर कस के बंद कर ली और बोली- बाप रे! ये तो बहुत कड़क है. वो मेरी तरफ़ घूमी और अपना हाथ मेरी लुंगी मे घुसा कर मेरे फ़ड़फ़ड़ाते हुए सामान को पकड़ लिया.
सामान को कस कर पकड़े हुए वो अपना हाथ सामान के जड़ तक ले गई, जिससे सुपाड़ा बाहर आ गया. सुपाड़े की साईज और आकार देख कर वो बहुत हैरान हो गईं.

बेटा कहाँ छुपा रखा था? ऐसा तो मैंने अपनी जिन्दगी में नहीं देखा है! उन्होंने पूछा.
मैंने कहा- यहीं तो था, तुम्हारे सामने लेकिन तुमने ध्यान ही नहीं दिया. यदि आप ट्रेन में गहरी नींद में नहीं होतीं तो शायद आप देख लेतीं क्योंकि ट्रेन में रात को मेरा सुपाड़ा आप की गुफा को रगड़ रहा था.
माँ बोली- मुझे क्या पता था कि, तुम्हारा इतना बड़ा होगा! ये मैं सोच भी नहीं सकती थी.
मुझे उनकी बिन्दास बोली पर आश्चर्य! हुआ जब उन्होंने, कहा और साथ ही में बड़ा मज़ा अया.

नंगी होकर बेटे की तमन्ना पूरी की- 2⬇️⬇️हैलो दोस्तो, मैं प्रीति एक बार पुनः अपने बेटे की कामुकता भरी कहानी को लेकर आपके स...
18/10/2025

नंगी होकर बेटे की तमन्ना पूरी की- 2⬇️⬇️
हैलो दोस्तो, मैं प्रीति एक बार पुनः अपने बेटे की कामुकता भरी कहानी को लेकर आपके सामने हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग में अब तक आपने सुन लिया था कि मेरे बेटे राहुल ने मुझसे नीतू को नंगी देखने की डिमांड की थी.

अब आगे
मैंने कहा- ओके, आज शाम को बताती हूँ.
मेरे इतना कहते ही राहुल बहुत खुश हो गया.
मैंने नीतू को उसकी इस इच्छा के बारे में बताया तो नीतू झट से मान गई.
वह बोली कि मॉम आप भी हमारे बीच में रहना.
मैंने कहा- मैं मॉम हूँ तुम्हारी!
नीतू बोली- प्लीज!
मैंने कहा- ठीक है.
फिर जब शाम हुई तो नीतू आ गई.
यहां मैं एक बात बताना चाहूँगी कि चूंकि नीतू की उम्र अभी कमसिन है तो उसके पीरियड जल्दी खत्म हो जाते हैं. जबकि मेरे को थोड़ा टाइम लगता है.
मैंने नीतू से कहा- ठीक है.
जब शाम हुई, तो सब ठीक समय पर हम तीनों एक ही कमरे में आ गए.
मैं तो साड़ी में थी जबकि नीतू लोवर टी-शर्ट में थी.
राहुल भी लोअर टी-शर्ट में था.
तभी नीतू ने राहुल से एक रिक्वेस्ट की कि अगर तुमने मुझे नंगी किया, तो तुझे मेरी चाटनी होगी.
यह सुनकर मैं हड़बड़ा कर बोली- ये कैसी रिक्वेस्ट है!

उधर राहुल झट से मान गया.
अब मैं भी अन्दर से कहीं न कहीं प्यासी होती जा रही थी.
राहुल ने नीतू को नंगी कर दिया.
उसने नीतू की पैंटी को छोड़कर उसके सारे कपड़े उतार दिए.
नीतू बड़ी ही मस्त लग रही थी.
उसके संतरे एकदम तने हुए थे और निप्पल एकदम कड़क हो गए थे.
उसकी पैंटी सफेद रंग की थी और पैड भी लगा हुआ था.
राहुल नीतू के पेट पर किस कर रहा था और वह बाकी जगह पर भी अपने होंठ फेरता जा रहा था.
नीतू की थिरकन साफ बता रही थी कि उसके अन्दर भी ठुकाई का असर हो रहा है.
मुझे पता नहीं क्या हो रहा था कि मैं भी गर्म होने लगी थी.
तभी नीतू भी नशीली आवाज में बोली- मॉम आप भी अपने कपड़े उतार दो.
मैं शायद यही चाह रही थी, तो मैंने एक बार भी मना नहीं किया और मैं भी अपनी साड़ी व अन्य कपड़े उतारने लगी.
राहुल ने जब नीतू की पैंटी उतारी, तो वह तो समझो पागल सा हो गया था.
वह नीतू की गुफा को चाटने लगा. वह अपनी बहन की टांग उठा उठा कर उसकी माहवारी से युक्त गुफा को चाट रहा था.
मुझे गंदा सा महसूस हो रहा था, लेकिन उसको बहुत मज़ा आ रहा था.
मुझे दूर से ही गुफा से गंदे खून की महक आ रही थी लेकिन उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह तो मदभरे अंदाज में गंदी गुफा को चाटता ही रहा.
उधर नीतू को भी इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था कि क्या ही कहूँ.

मैंने अपनी पूरी लाइफ में ऐसा अनुभव कभी नहीं ले पाई थी.
अब नीतू राहुल को नंगा करने लगी.
उस वक्त राहुल थोड़ा हिचक रहा था.
मैंने उसकी शर्म को खत्म करने के नजरिए से कहा- बेटा, आज तुम दोनों अपने मन को ठंडा कर लो.
राहुल अपना अंडरवियर नहीं उतारना चाह रहा था. शायद वह शर्म की वजह से ऐसा नहीं कर रहा था. वह बस नीतू की गुफा को चाटता जा रहा था.
मुझे अचानक से न जाने क्या हुआ कि मैं भी गर्म सा होने लगी थी.

जब राहुल ने नीतू की गुफा से मुँह हटाया, तब मैंने देखा कि नीतू की गुफा पर बाल भी उगे हुए थे और उसकी गुफा बहुत ही गोरी व सुंदर थी.
मेरी बेटी की गुफा के होंठ गुलाबी थे और गुफा एकदम चिकनी थी.
नीतू भी बहुत गर्म हो गई थी.
उसकी गुफा से सफेद पानी निकल रहा था.
अब राहुल ने भी अपना अंडरवियर उतार दिया. मैंने देखा कि राहुल का भी ठीक ठाक था.
उसका उसके पापा की तुलना ज़्यादा काला भी नहीं था.
अब उन दोनों ने मिल कर मुझे भी नंगी कर दिया.
मुझे बहुत शर्म लग रही थी कि आज मैं अपने बच्चों के सामने नंगी होकर मैं यह क्या कर रही हूँ.
अब तक वे दोनों ही मुझे चाटने लगे.
नीतू मेरे मुँह से मुँह लगा कर मेरे होंठों को चूसने लगी.
वह मेरे संतरो को भी मसल रही थी.
दूसरी तरफ राहुल ने मेरी पैंटी उतारी, तो उसने देखा कि मेरी गुफा पर चिपचिपा सा पानी था और कुछ ब्लड की बूँदें भी थीं.
वह बोला- मॉम ये क्या है?
नीतू बोली- तूने मुझे चाटा था न, वैसे ही मॉम को मज़े दो!
मैं मना कर रही थी कि नहीं बेटा. वह पीरियड का गंदा पानी है.
लेकिन उसने मेरी कोई बात नहीं मानी और वह मेरी चाटने लगा.
कुछ टाइम के बाद मुझे भी चटवाने में मज़ा सा आने लगा था.
नीतू भी बहुत गर्म हो गई थी, मतलब हम तीनों ही गर्म हो गए थे.
अब नीतू और राहुल दोनों मिलकर मेरी गुफा को चाटने लगे थे और मेरे मुँह पर नीतू की गुफा लग गई थी.
मैंने भी सोचा कि मैं भी क्यों पीछे रहूँ. इसलिए मैं भी नीतू की चाटने लगी.
उसकी गुफा से मस्त खट्टा सा पानी सा निकल रहा था, एकदम पतला और नमकीन सा पानी बड़ा मस्त लग रहा था.
मैंने उसकी गुफा के अन्दर तक जीभ डाली तो उसने गुफा के पानी के साथ अपनी सुसू की भी कुछ बूँदें निकाल दी थीं.

वह इतनी गर्म हो गई थी कि उसको खुद भी मालूम नहीं था कि उसकी गुफा से मूत भी निकल गया.
मुझे उसकी गुफा से निकला सब कुछ चाटने में बहुत मज़ा आया.
कुछ देर बाद नीतू बोली- मॉम मैं झड़ने वाली हूँ.
यह कहते ही वह चीखने लगी.
भी राहुल ने अपने लिप्स से उसे किस करके उसका मुँह बंद कर दिया और वह मेरी गुफा में उंगली करने लगा.
वह मुझसे बोला- मॉम चाटो इसकी गुफा जोर जोर से.
मैं गुफा पर अपना मुँह लगे हुई गुफा चाट ही रही थी कि तभी नीतू की झड़ने लगी.

मैं नीतू की चाट रही थी लेकिन जब नीतू झड़ी थी तो उसकी पेशाब की भी काफी सारी बूँदें निकलने लगी थीं, जिससे मैं चाटती रही.
वह निढाल हो कर मेरे ऊपर पड़ी ही रह गई.
वह लंबी आह भरती हुई बोली- मज़ा आ गया मॉम, तुमने गजब चाटी है मेरी बुर.
राहुल बोला- मॉम मज़ा आयां आपको!
मैंने शांत होकर कहा- ज़्यादा खास नहीं.
अभी केवल नीतू ही झड़ी थी.
राहुल और मैं अभी बाकी थे.
राहुल भी नीतू की तरह ही मेरे ऊपर 69 में लेट गया.
वह मेरी गुफा को छोड़ कर मेरी जांघों को चाटने लगा.

उस टाइम मुझे बहुत मज़ा आया.
वह जांघ को मस्त चाट रहा था.
जांघ के निचले हिस्से से चाटता हुआ वह ऊपर मेरे लिप्स तक तक आ जाता.
थोड़ी देर बाद उसने मेरी गुफा को फिर से चाटा.
वह बोला- मॉम, आपकी गुफा बहुत ही नमकीन है, नीतू की इतनी नमकीन नहीं है.
वह मुझे बिना झाड़े ही बाजू में लेट गया.
मुझे गुस्सा आ रहा था कि साला अलग क्यों हो गया.
अब वह बोला- मज़ा आ गया!
नीतू लेटी हुई ही सब देख रही थी.
मुझे इतना ज्यादा अच्छा सी महसूस हो रही थी कि मैं क्या बताऊं!
मैं कुछ समझ गई थी कि यह साला क्यों अलग हुआ.

मैं तुरंत उठकर बैठ गई और अपने हाथ से राहुल का पकड़ कर अपने मुँह में भर लिया.
राहुल बड़ी मस्त नजरों से यह कारनामा देख रहा था कि मॉम अब मेरे सामान का क्या करेंगी!
मैं उसके सामान को ठीक मूवी की एक्ट्रेस की तरह चूसने लगी.
राहुल का मुँह में लेते ही वह बोला- आह मॉम, मुँह से बाहर निकालो जल्दी!
मैं छोड़ना नहीं चाहती तो मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह बोला- मुझे बहुत ही ज्यादा गुदगुदी सी हो रही है और गर्मी से लगने लगी.
मैंने उसके सामान के नीचे वाले बॉल को चूसना शुरू कर दिया. पहले हल्के हल्के से चूसा, बाद में मुँह में बॉल भर कर चूसने लगी.
उसके बॉल बड़े थे लेकिन सच बोलूँ तो राहुल के पापा का बहुत मस्त था.
क्योंकि उनके सामान से स्मेल नहीं आती है.
जबकि राहुल के सामान से गंदी सी स्मेल आ रही थी.
स्मेल की बात छोड़ दूं तो राहुल के सामान में सख्ती थी.
उसके सामान का तनाव बेहद सख्त था.
मैंने दोबारा से मुँह में भर लिया.
उसका मेरे मुँह में पूरा अन्दर तक जा ही नहीं पा रहा था.

ठुकाई के मजे लेते हुए इतने में राहुल झड़ गया और उसने मेरे मुँह में ही अपने सामान का सारा पानी निकाल दिया.
मैंने मुँह में उसके सामान से निकला सारा पानी पी लिया तो अहसास किया कि उसके सामान का पानी बहुत ही पतला था, नमकीन भी बहुत कम था.
नीतू बोली- मॉम, थोड़ा मुझे भी चखाओ कि सामान का पानी कैसा होता है?
मैंने अपने मुँह से आधा पानी उसके हाथ पर निकाला और आधा पानी मैं पी गई.
नीतू ने जब पानी देखा तो बोली- सामान के पानी में सफेद सफेद सा गाढ़ा गाढ़ा होता है और पानी भी!
मैंने बोला- पूरा ही सफेद होता है और गाढ़ा भी होता है

नीतू बोली- पर इसका तो पतला है!
मैंने बताया- ये रोज निकालता है अपना पानी इसलिए इसका पानी पतला है.
नीतू अपने हाथ को मुँह के पास ले गई और उसने रस को जीभ की नोक से चखा तो उसे हल्का नमकीन सा लगा.
वह एकदम से सारा पानी पी गई और बोली- मॉम, सामान का पानी नमकीन सा होता है.
राहुल झड़ कर ठंडा हो गया था और लेटा ही रहा.
उसका ढीला हो गया था.
मैं अभी नहीं झड़ी थी जबकि ये दोनों झड़ चुके थे.
मैंने काफ़ी दिनों से गुफा में फिंगरिंग नहीं की थी.
तभी राहुल बोला- मॉम आप कब झड़ोगी?
नीतू भी बोली- हां मॉम हम दोनों देखना चाहते हैं कि आपका पानी कैसा निकलता है?
नीतू धीरे धीरे थोड़ी गर्म होने लगी थी.
मैंने नीतू से कहा- जा मेरा वाइब्रेटर ले आ.
वह झट से ले आई.
मुझे तनिक भी हैरानी नहीं हुई कि उसे मेरे इस वाइब्रेटर टॉय की जानकारी कैसे है.
इस वाइब्रेटर की वाइब्रेशन की वजह से मुझे कुछ मज़ा आना शुरू हुआ.
थोड़ी देर बाद राहुल फिर से गर्म होने लगा, लेकिन उसका खड़ा नहीं हुआ था.
वे दोनों मुझे फिर से चाटने लगे और थोड़ी ही देर बाद मैं बोली- अब मैं झड़ने वाली हूँ.
यह सुनकर दोनों लोग मेरी गुफा के पास मुँह करके चाटने लगे.
मैं झड़ी तो दोनों ने गुफा को चाटा और दोनों चटखारा लेते हुए बोले कि मज़ा आ गया.
अब हम तीनों नंगे ही लेट गए और आपस में बातें करने लगे.
इसके बाद मेरे बेटे ने मेरी ली और उसके बाद उसने मेरे सामने ही अपनी बहन की गुफा भी पेली.

दोस्त की माँ, बुआ और बहन की -1यह कहानी मेरे दोस्त की माँ, बुआ और बहन की है. यह बात आज से 9-10 वर्ष पहले की है जब मेरी उम...
18/10/2025

दोस्त की माँ, बुआ और बहन की -1
यह कहानी मेरे दोस्त की माँ, बुआ और बहन की है. यह बात आज से 9-10 वर्ष पहले की है जब मेरी उम्र 20-21 साल की थीं. उन दिनों मैं मुम्बई में रहता था.

मेरे मकान के बगल में एक नया किरायेदार सुखबिंदर रहने आया. वो किराये के मकान में अकेला रहता था. मेरी हमउम्र का था इसलिए हम दोनों में गहरी दोस्ती हो गई. वो मुझ पर अधिक विश्वास रखता था क्योंकि मैं एक सरकारी कर्मचारी था और उससे ज्यादा पढ़ा लिखा था. वो एक निजी फैक्ट्री मे मशीन ऑपरेटर था.

उसके परिवर में केवल 4 सदस्य थे. उसकी विधवा माँ 41 साल की, विधवा बुआ (यानी कि उसकी माँ की सगी ननद) 35 साल की और उसकी कुँवारी बहन 18-19 साल की थीं. वे सब उसके गाँव में रहकर अपनी खेती बाड़ी करते थे.
दीवाली की छुट्टियों में उसकी माँ और बहन मुम्बई में 1 महीने के लिये आए हुए थे. दिसम्बर में उसकी माँ और बहन वापस गाँव जाने की जिद्द करने लगे. लेकिन काम अत्यधिक होने के कारण सुखबिंदर को 2 महीने तक कोई भी छुट्टी नहीं मिल सकती थीं. इसलिए वो परेशान रहने लगा.
वो चाहता था कि किसी का गाँव तक साथ हो तो वो माँ और बहन को उसके साथ भेज सकता है. लेकिन किसी का भी साथ नहीं मिला.
सुखबिंदर को परेशानी में देख कर मैंने पूछा, क्या बात है सुखबिंदर? आज कल तुम ज्यादा परेशान रहते हो!

सुखबिंदर: क्या करूं यार, काम ज्यादा होने के कारण मेरे ऑफ़िस में मुझे अगले 2 महीने तक छुट्टी नहीं मिल रही है और इधर माँ गाँव जाने की जिद कर रही हैं. मैं चाहता हूँ कि, अगर कोई गाँव तक किसी का साथ रहे तो माँ और बहन अच्छी तरह से गाँव पहुँच जायेंगी और मुझे भी चिन्ता नहीं रहेगी. लेकिन गाँव तक का कोई भी साथ नहीं मिल रहा है ना ही मुझे छुट्टी मिल रही है, इसलिए मैं काफ़ी परेशान हूँ.

दीनू: यार अगर तुम्हे ऐतराज ना हो तो, मैं तुम्हारी परेशानी का हल कर सकता हूँ और मेरा भी फ़ायदा हो जायेगा.
सुखबिंदर: यार, मैं तुम्हारा यह एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूँगा! अगर तुम मेरी परेशानी हल कर दो तो. लेकिन यार, तुम कैसे मेरी परेशानी हल करोगे और कैसे तुम्हारा फ़ायदा होगा?

यार, सरकारी दफ्तर के अनुसार मुझे साल में 1 महीने की छुट्टी मिलती है. अगर मैं छुट्टी लेता हूँ तो मुझे गाँव या कही भी जाने का, आने जाने का किराया भी मिलता है और एक महीने की पगार भी मिलती है. अगर मैं छुट्टी ना लूँ तो, 1 महीने की छुट्टी समाप्त हो जाती है और कुछ नहीं मिलता है.
सुखबिंदर: यार, तुम छुट्टी लेकर माँ और बहन को गाँव पहुँचा दो, इस बहाने तुम मेरा गाँव भी घूम आना!

अगले दीनू से मैंने छुट्टी के लिए आवेदन पत्र दे दिया, और मेरी छुट्टी मंजूर हो गई.
सुखबिंदर ने साधारण टिकट लेकर हम दोनों को रेलवे स्टेशन पहुँचाने आया. हमने टीटी से विनती कर के किसी तरह बर्थ की 2 सीट ले ली.
गाड़ी करीब रात 8:40 पर रवाना हुई.
रात करिब 10 बजे हमने खाना खाया और गपशप करने लगे. बहन ने कहा, भैया मुझे नींद आ रही है! और वो उपर के बर्थ पर सो गई.
कुछ देर बाद माँ भी नीचे के बर्थ पर चादर ओढ़ कर सो गई और कहा कि, तुम अगर सोना चाहते हो तो मेरे पैर के पास सिर रख कर सो जाना.

मुझे भी थोड़ी देर बाद नींद आने लगी, और मैं उनके पैर के पास सिर रख कर सो गया. सोने से पहले मैंने पैंट खोल कर शोर्ट पहन लिया.
माँ अपने बाईं तरफ़ करवट कर के सो गईं. कुछ देर बाद मुझे भी नींद आने लगी और मैं भी उनकी चादर ओढ़ कर सो गया.
अचानक! रात करीब 1:30 मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि, माँ की साड़ी कमर के उपर थीं और उनकी गुफा घनी बालो के बीच छुपी थीं. उनका हाथ मेरे शोर्ट पर सामान के करीब था.
यह सब देख कर मेरा शोर्ट के अन्दर फड़फड़ाने लगा. मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा था कि, क्या करूँ. मैं उठकर पेशाब करने चला गया.
जब वापस आया मैंने चादर उठा कर देखा कि, माँ अभी तक उसी अवस्था में सोई थीं. मैं भी उनकी तरफ़ करवट कर के सो गया. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थीं.

बार बार मेरी आँखों के सामने उनकी गुफा घूम रही थी. थोड़ी देर बाद एक स्टेशन आया. वहाँ 5 मिनट तक ट्रेन रुकी थी और, मैं विचार कर रहा था कि क्या करूँ!
जैसे ही गाड़ी चली मेरे भाग्य ने साथ दिया और हमारे डिब्बे की लाईट चली गई. मैंने सोचा कि, भगवान भी मेरा साथ दे रहा है.
मैंने अपना शोर्ट से निकल कर सामान के सुपाड़े की टोपी नीचे सरका कर सुपाड़े पर ढेर सारा थूक लगा कर सुपाड़े को गुफा के मुख के पास रख कर सोने का नाटक करने लगा.
गाड़ी के धक्के के कारण आधा सुपाड़ा उनकी गुफा में चला गया लेकिन, माँ की तरफ़ से कोई भी हरकत ना हुई. या तो वो गहरी नींद में थीं, या वो जानबूझ कर कोई हरकत नहीं कर रही थीं.
मैं समझ नहीं पाया. गाड़ी के धक्के से केवल सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा गुफा में अन्दर बाहर हो रहा था.
एक बार तो मेरा दिल हुआ कि, एक धक्का लगा कर पूरा का पूरा गुफा में डाल दूँ. लेकिन संकोच और डर के कारण मेरी हिम्मत नहीं हुई.
गाड़ी के धक्के से केवल सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा गुफा में अन्दर बाहर हो रहा था. इस तरह पेलते पेलते मेरे सामान ने ढेर सारा फ़व्वारा उनकी गुफा और बालो के ऊपर निकाल दिया.

अब मैं अपना शोर्ट में डाल कर सो गया.
करीब सवेरे 7 बजे माँ ने उठाया और कहा कि, चाय पिलो और तैयार हो जाओ क्योंकि 1 घन्टे में हमारा स्टेशन आने वाला है. मैं फ़्रेश हो कर तैयार हो गया.
स्टेशन आने तक माँ बहन और मैं इधर उधर की बातें करने लगे. करीब 9:30 बजे हम सुखबिंदर के घर पहुँचे.
वहाँ पर सुखबिंदर की बुआ ने हमारा स्वागत किया और कहा- नहा धोकर नाश्ता कर लो.
हम नहा धोकर आँगन में बैठ कर नाश्ता करने लगे.

करीब 11 बजे बुआ ने माँ से कहा- भाभी जी आप लोग थक गए होंगे, आप आराम कीजिये मैं खेत में जा रही हूँ और मैं शाम को लौटूंगी.
माँ ने कहा, ठीक है! और मुझसे बोली, अगर तुम आराम करना चाहो तो आराम कर लो नहीं तो बुआ के साथ जा कर खेत देख लेना.
मैंने कहा कि, मैं आराम नहीं करुगा क्योंकि मेरी नींद पूरी हो गई है! मैं बुआ जी के साथ खेत चला जाता हूँ, वहाँ पर मेरा समय भी पास हो जायेगा.
मैं और बुआ खेत की ओर निकल पड़े. रास्ते में हम लोगों ने इधर उधर की काफ़ी बातें की. उनका खेत बहुत बड़ा था. खेत की एक कोने मे एक छोटा सा मकान भी था. दोपहर होने के कारण आजू बाजू के खेत में कोई भी न था.

खेत पहुँच कर बुआ जी काम में लग गईं और कहा कि, तुम्हे अगर गर्मी लग रही हो तो शर्ट निकाल लो उस मकान में लुंगी भी है चाहे तो, लुंगी पहन लो और यहाँ आकर मेरी थोड़ी मदद कर दो.
मैं मकान में जाकर शर्ट उतार दिया और लुंगी बनियान पहनकर बुआ जी के काम में मदद करने लगा. काम करते करते कभी-कभी मेरा हाथ बुआ जी के हिप पर भी टच होता था.
कुछ देर बाद बुआ जी से मैंने पूछा- बुआ जी यहाँ कहीं पेशाब करने की जगह है?
बुआ जी बोली- मकान के पीछे झाड़ियों में जाकर कर लो.
मैं जब पेशाब कर के वापस आया तो देखा बुआ जी अब भी काम कर रही थीं.
थोड़ी देर बाद बुआ जी बोलीं- आओ अब खाना खाते हैं और थोड़ी देर आराम कर के फ़िर काम में लग जाएँगे.
अब हम खेत के कोने वाले मकान में आकर खाना खाने की तैयारी करने लगे. मैं और बुआ दोनों ने पहले हाथ पैर धोये फिर खाना खाने बैठ गए. बुआ जी मेरे सामने ही बैठ कर खाना खा रही थीं.

खाना खाते समय मैंने देखा कि, मेरी लुंगी जरा साईड में हट गई थी. जिस कारण मेरी चड्डी से आधा निकला हुआ दिखाई दे रहा था और बुआ जी की नज़र बार बार मेरे सामान पर जा रही थी. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा और, बीच बीच में उनकी नज़र मेरे सामान पर ही जा रही थीं.

खाना खाने के बाद बुआ जी बरतन धोने लगीं जब वो झुक कर बरतन धो रही थीं तो मुझे उनके बड़े बड़े संतरे साफ़ नज़र आ रहे थे. उन्होंने केवल ब्लाऊज़ पहना हुआ था. बरतन धोने के बाद वो कमरे में आकर चटाई बिछा दी और बोलीं चलो थोड़ी देर आराम करते है. मैं चटाई पर आकर लेट गया.

बुआ बोलीं- बेटा! आज तो बड़ी गर्मी है!
कह कर उन्होंने अपनी साड़ी खोल दी और केवल पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन कर मेरे बगल में आकर उस तरफ़ करवट कर के लेट गईं.
अचानक! मेरी नज़र उनके पेटीकोट पर गई. उनकी दाहिनी ओर की कमर पर जहाँ पेटीकोट का नाड़ा बंधा था वहा पर काफ़ी गेप था और, गेप से मैंने उनकी कुछ कुछ दिखाई दे रही थी.
अब मेरा लुंगी के अन्दर हरकत करने लगा. थोड़ी देर बाद बुआ जी ने करवट बदली तो मैंने तुरंत आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा.
थोड़ी देर बाद बुआ जी उठीं और मकान के पीछे चल पड़ीं. मैं उत्साह के कारण मकान की खिड़की पर गया. खिड़की बंद थीं, लेकिन उसमे एक सुराख था.
मैं सुराख पर आँख लगाकर देखा तो मकान का पिछला भाग साफ़ दिखाई दे रहा था. बुआ वहाँ बैठ कर पेशाब करने लगी.
सब करने के बाद बुआ जी थोड़ी देर अपनी गुफा सहलाती रही फिर, उठकर मकान के अन्दर आने लगी. फ़िर मैं तुरंत ही अपनी स्थान पर आकर लेट गया.
बुआ जी जब वापस मकान में आईं तो, मैं भी उठकर पिछली तरफ़ पेशाब करने चला गया. मैं जान बूझ कर खिड़की की तरफ़ पकड़ कर पेशाब करने लगा.
मैंने महसूस किया कि खिड़की थोड़ी खुली हुई थी और बुआ जी की नज़र मेरे सामान पर थी.

पेशाब करके जब वापस आया तो देखा, बुआ जी चित लेटी हुई थीं. मेरे आने के बाद बुआ बोलीं बेटा आज मेरी कमर बहुत दुख रही है. क्या तुम मेरी कमर की मालिश कर सकते हो?
मैंने कहा- क्यों नहीं!
उसने कहा, ठीक है! सामने तेल की शीशी पड़ी है उसे लगा कर मेरी कमर की मालिश कर देना, और फिर वो पेट के बल लेट गईं. मैं तेल लगा कर उनकी कमर की मालिश करने लगा.
वो बोली- बेटा थोड़ा नीचे मालिश करो.
मैंने कहा- बुआ जी थोड़ा पेटीकोट का नाड़ा ढीला करोगी तो मालिश करने में आसानी होगी और पेटीकोट पर तेल भी नहीं लगेगा.
बुआ जी ने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया. अब मैं उनकी कमर पर मालिश करने लगा. उन्होंने और थोड़ा नीचे मालिश करने को कहा. मैं थोड़ा नीचे की तरफ़ मालिश करने लगा.
थोड़ी देर मालिश करने के बाद वो बोली, बस बेटा और नाड़ा बंद कर लेट गईं. मैं भी बगल में आकर लेट गया. अब मेरे दिल और दिमाग ने बुआ को कैसे पेला जाए!

यह विचार करने लगा. आधे घण्टे के बाद बुआ जी उठी और साड़ी पहन कर अपने काम में लग गईं.
शाम को करीब 6 बजे हम घर पहुँचे. घर पहुँचकर मैंने कहा- माँ मैं बाजार जा रहा हूँ और 1 घण्टे बाद आ जाऊँगा.
यह कहकर मैं बाजार की ओर निकल पड़ा.
कहानी जारी रहेगी.

नंगी होकर बेटे की तमन्ना पूरी की- 1 ⬇️हैलो दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है और मैं जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रही हूँ. अगर...
17/10/2025

नंगी होकर बेटे की तमन्ना पूरी की- 1 ⬇️
हैलो दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है और मैं जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रही हूँ. अगर कोई गलती हो जाए तो आप क्षमा कर दीजिएगा.
ये मेरे जीवन की एक कहानी है जिसे सुनकर आप खुद ही समझ जाएंगे कि यह सच है या कोरी गप है.
यह बात 24 जून 2023 की है. मेरा घर एमपी के ग्वालियर में है और तब मेरी उम्र अभी 39 साल की थी.
मेरी फैमिली में 4 सदस्य हैं. मेरे हज़्बेंड केरल में जॉब करते हैं. मेरी एक बेटी और एक बेटा है.
मेरी शादी 18 साल की उम्र में ही हो गई थी.
शादी के अगले नौ महीने में ही मैं एक बेटे की मां बन गई थी और अगले साल पुनः एक बेटी को जन्म दिया था.
यह मेरे साथ मेरे बेटे के ठुकाई की कहानी है.
बेटे की उम्र 20 साल की है और बेटी की उम्र 19 साल की है.
हुआ कुछ ऐसा कि 24 तारीख को हमारे यहां बारिश बहुत तेज हो रही थी. उस दिन घर पर पति नहीं थे.
हम 3 लोग ही घर में थे.
उस दिन मुझे और मेरी बेटी नीतू को पीरियड आ गए थे.
शाम 6 बजे का वक्त था, उस समय भी बारिश तेज हो रही थी.
घर पर पैड नहीं थे.
मुझे उस समय तक यह नहीं पता था कि मेरी बेटी नीतू को भी पीरियड होना शुरू हो गए हैं.
उसने भी मुझे शाम को ही बताया कि मॉम मुझे पीरियड आ गए हैं.
मैंने कहा- मुझे भी आज ही आए हैं.
राहुल को पीरियड के बारे में कुछ पता नहीं था.
तभी वह मेरे पास आकर बोला- नीतू दीदी, आज पकौड़े बना लो.
मैंने कहा- नहीं, आज नहीं बन सकते हैं.
वह बोला- आज क्यों नहीं बनेंगे?
मैंने कहा- घर पर बेसन नहीं है.
वह बोला- ठीक है.
फिर शाम का खाना बनाया तो मैंने और नीतू ने 2 रोटी ही खाईं क्योंकि हम दोनों को ही मासिक धर्म के समय होने वाला दर्द बहुत तेज हो रहा था.
राहुल बोला- आज तुम लोगों ने खाना कम क्यों खाया है?

मैंने कहा- आज मन नहीं था.
नीतू ने भी यही बहाना बना दिया.
थोड़ी देर के बाद नीतू बोली- मॉम पैड मंगवा दो, बहुत ब्लीडिंग हो रही है.
तो मैंने कहा- किससे मंगवाऊं बेटा, ऐसा कर कि आज हम नीचे बिना कपड़े पहने ही लेट जाएंगे.
उसने ओके कह दिया.
जब कभी मुझे या मेरी बेटी नीतू को पीरियड होते हैं, तो उस दिन हम लोग नीचे बिना कपड़े पहने सो जाते हैं.
मैंने अपनी बेटी से कहा कि नीतू तुम आज मेरे रूम में ही लेट जाना. हम दोनों एक ही जगह सो जाएंगे.
तो नीतू बोली- मम्मी मुझे शर्म आ रही है.
मैंने उसको बहुत समझाया तो वह मान गई.
राहुल दूसरे कमरे में लेट गया और नीतू ओर मैं एक ही कमरे में थे.
मैंने नीतू से कहा कि पैड नहीं है, तो तुम कोई पुरानी पैंटी पहन लो और मेरे बेड पर लेट जाओ.
वह थोड़ी देर एक पुरानी पैंटी पहन कर आई और मेरे बाजू में लेट गई.
कुछ देर बाद राहुल की आवाज आई.
तो मैं उधर गई.
उसने कहा- आज तुम दोनों को हो क्या गया है. एक ही रूम में सो रही हो और मुझसे बात भी नहीं कर रही हो?

मैंने उसे बताया कि आज हम दोनों को पीरियड आए हैं इसलिए!
वह बोला कि तो एक कमरे में क्यों सो रही हो?
तो मैंने साफ साफ बोला कि आज घर में पैड नहीं हैं और बाहर बारिश हो रही है, इसलिए हम दोनों एक ही बेड पर सो जाएंगे ताकि ज़्यादा कपड़े गंदे ना हो’.
राहुल बोला- लाओ मुझे पैसे दो, मैं पैड लेकर आता हूँ … अब तो बारिश भी धीमी हो गई है.
फिर रात को नौ बजे वह बाजार गया और पैड के 4 पैकेट ले आया.
वह घर आकर बोला- मुझे पहले क्यों नहीं बताया, मैं तभी ला देता.
मैंने कहा- उस वक्त अगर तुम मना कर देते तो बहुत टेंशन हो जाती.
राहुल बोला- मॉम इसके लिए मैं मना नहीं करता.
वह अपने कमरे में चला गया.
अब मैं अपने कमरे में आई तो मैंने नीतू को बताया कि राहुल अभी पैड लाया है, लो … तुम भी लगा लो.
फिर हम दोनों ने पैड लगा लिए और राहुल के पास आ गए.
कुछ देर तक हम तीनों बातें करते रहे
तभी राहुल बोला- तुम दोनों को एक साथ ही पीरियड आता है क्या?
नीतू बोली- मुझे खुद आज ही पता चला है कि मम्मी को भी पीरियड आज ही है.
इसी तरह की बातों के बाद हम तीनों अपने अपने कमरे में सोने चले गए.
मुझे रात 3 बजे टॉयलेट जाना था और पैड भी बदलना था.
राहुल का कमरा वॉशरूम के सामने ही है.
उसके कमरे की खिड़की खुली थी.
तभी मैंने देखा कि राहुल न्यूड होकर सो रहा है.
मैं पहले तो हिचकिचाई पर फिर मैं राहुल के कमरे में गई.
मैंने उसको चादर उढ़ाई और उसके कमरे के दरवाजे बंद करके वापस चली आई.
फिर सुबह के टाइम राहुल मार्केट गया था, तब नीतू बोली कि मम्मी आज राहुल को क्या हुआ था. वह रात को पूरा नंगा सो रहा था!

मैंने मन में कहा कि मुझे तो पहले ही पता था. वैसे आज तो वह नंगा सो रहा था, लेकिन आज तक तो ऐसे वह कभी नहीं सोता था.
सामने से मैं बोली कि हां मैंने भी आज ही ऐसा देखा था. मैं उसके ऊपर चादर भी डालकर आई थी.
नीतू- मैं बताऊं मॉम कल जब वह सो रहा था, तब वह झड़ भी गया था. उसको पता ही नहीं था.
मैं चुप रही.
कुछ देर बाद राहुल मार्केट से वापस आ गया.
उसके कुछ देर बाद हम सब साथ में लूडो खेल रहे थे.
तभी मैंने पूछा कि राहुल कल तुम्हें कौन सा सपना आया था?
वह कुछ समझा नहीं.
उसने मेरी बात को नजरअंदाज करते हुए कह दिया कि मुझे कोई सपना नहीं आया था.
नीतू मुझसे बोली कि मम्मी रात को गेट तो बंद कर ही लिया करो!

अब वह समझ गया कि किस मुद्दे पर बात हो रही है.
मैंने फिर से कहा- राहुल कल तुम्हें क्या हो गया था? वैसे मैं रोज नाइट में देखने जाती थी लेकिन कल तुम नंगे क्यों सो रहे थे?
राहुल बोला- सॉरी मम्मी!
मैंने बोला- वैसे नँगा सोना कोई ग़लत बात नहीं है, पर ऐसा क्या हुआ कि तुम कल इस तरह से सो रहे थे?
राहुल इस बात पर शर्मा गया और बोला- चलो छोड़ो ना इन बातों को!
मैंने कहा- बेटा नंगे सोना कोई ग़लत बात नहीं, पर ऊपर से कुछ डालकर सोना चाहिए था ना, अगर कल घर पर कोई गेस्ट होता, तो वह क्या समझता कि ये कैसा लड़का है?
राहुल ने धीमे से कहा- मम्मी वह कल मेरा मन बहुत बिगड़ गया था तो मैंने वीडियोस देखी थी और मैं नंगा होकर देख रहा था. फिर मुझे नींद आ गई और मैं वैसे ही नंगा सो गया. लेकिन अब ऐसा कभी नहीं होगा.

मुझे मालूम था कि नीतू भी कभी कभार वीडियो देखती है.
इसलिए मैंने राहुल और नीतू से कहा कि आज से तुम लोग वीडियोज नहीं देखोगे. मुझे पता है कि तुम लोग अपने रूम के गेट को बंद करके नंगे होकर देखते हो, इसलिए अब से गेट भी बंद नहीं होंगे. मैं सबको चैक करूंगी.
तभी राहुल बोला कि कल रात को मैं एक बजे टॉयलेट गया था, तो मैंने नीतू को पैंटी में देखा था पैड के साथ, उस टाइम नीतू केवल पैंटी में थी, तो मैं टॉयलेट चला गया और उसके बाद आकर सो गया.
उसी टाइम नीतू बोली- मॉम ने मुझे न्यूड सोने को बोला था.
फिर हम तीनों इसी तरह की बातें करते रहे.
कुछ देर बाद नीतू के जाने पर राहुल मुझसे बोला कि पीरियड कितने दिनों तक चलता है?
मैं बोली- क्यों पूछ रहे हो?

राहुल बोला कि एक दिन मुझे नीतू को न्यूड देखने की इच्छा है.
मैं बोली- तुम नीतू को न्यूड क्यों देखना चाहते हो?
राहुल बोला- मॉम मैं यह सब काफी समय से चाहता था कि किसी को न्यूड देखूँ!
मैंने कहा- वह तो तुम्हारी बड़ी दीदी है ना, उसके बारे ऐसा कैसे सोच सकते हो?
राहुल बोला- मॉम प्लीज आज आपने पूछा, तो मैंने अपने मन की बात बता दी. मैं बहुत दिनों से पढ़ाई में भी ध्यान नहीं लगा पा रहा हूँ. बस रोज रात को नंगी लड़की के ड्रीम आते हैं और रोज मैं झड़ भी जाता हूँ.
मैं बोली- तो अब तक क्यों नहीं बताया?
राहुल बोला- मुझे डर लग रहा था कि कहीं आप मुझे ग़लत ना समझो या मेरे साथ मार पीट न कर दो.
मैं उसे पुचकार कर बोली- बेटा, ये उम्र ही ऐसी है. यही हालत नीतू की भी होगी. अभी तुमको गंदे सपने आएंगे, फिर कुछ दिन बाद नहीं आएंगे. यही बात नीतू बोल रही थी.

राहुल ने कहा- मॉम आज आप मुझसे अच्छे से पूछ रही हैं, तो मुझे अपने मन की बात बताने में शर्म नहीं लग रही है. अगर आप वैसे पूछतीं तो बहुत शर्म लगती.
मैं बोली- बेटा मैं तुम्हारी मां हूँ. मुझे तो ये बात बहुत पहले ही पता थी कि तुमको ऐसा होगा. क्योंकि मैं भी तो ऐसी उम्र से आई हूँ.
वह चुप होकर मेरी तरफ ऐसे देखने लगा मानो वह मुझसे मेरी जवानी की बात सुनना चाहता हो.
मैंने राहुल से कहा- ओके, तुमको नंगा देखने को या करने का भी मन करता है न!
राहुल ने कहा- हां मॉम, मन करता है और मैं हर रोज हिला कर खुद को ठंडा कर लेता हूँ. कभी कभी तो मैं आपकी पैंटी या नीतू की पैंटी देखकर भी अपना हिला लेता हूँ.
मैंने कहा- ऐसा क्यों करते हो?
राहुल बोला- मन नहीं मानता था!
मैंने कहा- और क्या करते थे?
उसने बताया कि जब आप नहाती थीं या नीतू नहाती थी, तब बाथरूम के गेट के नीचे से झांक कर भी देखता था. मगर कभी सही से नहीं देख पाया था.

मैंने राहुल से कहा- मेरी पैंटी कभी कभार जहां मैं रखती थी, वहां क्यों नहीं मिलती थी … और ऐसा ही नीतू की पैंटी के साथ भी होता था, तब क्या तुम ही यह सब करते थे?
वह बोला- मॉम जब मन करता था तो मैं आपकी पैंटी या ब्रा … या नीतू के कपड़ों को चाटता था और फिर उसी में अपना हिला कर झड़ जाता था. झड़ने के बाद ही मुझे शांति मिलती थी.
मैंने कहा- हां काफी बार मैंने अपनी पैंटी की गीली देखी थी, पर मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था कि तुम ऐसा भी करोगे!

वह कुछ नहीं बोला.
मैं- ठीक है, अब तुम खुल कर यह बताओ कि तुम्हारे मन में क्या है!
वह बोला कि मुझे ना नंगी लड़की को देखना है!
मैं बोली- मुझे देखोगे?
राहुल बोला- आप नहीं, नीतू को दिखा दो प्लीज!
मैं उसकी बात सुनकर सनाका खा गई.
दोस्तो, इस कहानी के अगले भाग में आपको विस्तार से सुनाऊँगी कि मैं अपने बेटे के सामने किस तरह से नंगी हुई और हम दोनों मां बेटी ने अपने बेटे व भाई को किस तरह से संतुष्ट किया.

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