11/01/2022
आदरणीय बंधु
गत् तेरह वर्षों से गौशाला में आप सब की कृपा और सहयोग से सेवारत हूं। सोचा था रिटायर होने के बाद घर बैठ अपने नाती पोतों सहित हंसी खुशी जीवन व्यतीत करूंगा पर वह कहते हैं न
"होइहीं वही जो राम रचि राखा"
इसे मैं अपना सौभाग्य ही समझूंगा। आरंभ में लोगों का उत्साह देखते ही बनता था पर कालांतर में उनका सहयोग तो दूर दर्शन भी महंगे हो गये।
स्वामी राम मोहन दास जी जिनकी प्रेरणा और आशीर्वाद से गौशाला को आरंभ किया गया था अपनी तरफ से जितना भी बन पाता है गौशाला में डालते रहते हैं इसके अतिरिक्त श्री विक्रम शर्मा जी जो विदेश में रहते हैं समय-समय पर सहयोग करते रहते हैं।
अगर खर्च की बात करें तो महीने में लगभग चार लाख से पांच लाख तक का खर्च आता है। जिसे वहन करना अति कठिन कार्य है। दान कितना आता होगा आप स्वयं अनुमान लगा लें। किसी से पैसा लेना कठिन है यह भी आप बेहतर जानते हैं।
अब जीवन की दहलीज़ पर बैठा हूं। अब न तो उतना जोश है और न ही उतना बल।
मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि अब आप इस कार्य हेतु आगे आयें और इस कार्य को आगे कैसे चलाया जाये
धन्यवाद।
कमल देव कौशल