Sh Shakti Gobind Goshala Lehri Barota Dist Bilaspur

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11/01/2022

आदरणीय बंधु
गत् तेरह वर्षों से गौशाला में आप सब की कृपा और सहयोग से सेवारत हूं। सोचा था रिटायर होने के बाद घर बैठ अपने नाती पोतों सहित हंसी खुशी जीवन व्यतीत करूंगा पर वह कहते हैं न
"होइहीं वही जो राम रचि राखा"
इसे मैं अपना सौभाग्य ही समझूंगा। आरंभ में लोगों का उत्साह देखते ही बनता था पर कालांतर में उनका सहयोग तो दूर दर्शन भी महंगे हो गये।
स्वामी राम मोहन दास जी जिनकी प्रेरणा और आशीर्वाद से गौशाला को आरंभ किया गया था अपनी तरफ से जितना भी बन पाता है गौशाला में डालते रहते हैं इसके अतिरिक्त श्री विक्रम शर्मा जी जो विदेश में रहते हैं समय-समय पर सहयोग करते रहते हैं।
अगर खर्च की बात करें तो महीने में लगभग चार लाख से पांच लाख तक का खर्च आता है। जिसे वहन करना अति कठिन कार्य है। दान कितना आता होगा आप स्वयं अनुमान लगा लें। किसी से पैसा लेना कठिन है यह भी आप बेहतर जानते हैं।
अब जीवन की दहलीज़ पर बैठा हूं। अब न तो उतना जोश है और न ही उतना बल।
मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि अब आप इस कार्य हेतु आगे आयें और इस कार्य को आगे कैसे चलाया जाये
धन्यवाद।
कमल देव कौशल

26/12/2021

श्री शक्ति गोबिंद गोशाला लैहड़ी बरोटा जिला बिलासपुर (हि प्र)
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आज गाड़ी लेकर गौशाला जा रहा था। अचानक गाड़ी चलाते चलाते दायीं ओर नज़र गई। ऐसा लगा जैसे झाड़ियां हिल रही हों। सोचा अवश्य कोई जंगली जानवर छुपा अथवा भागा होगा। खैर जिज्ञासा को नहीं रोक सका। कहीं कोई जंगली जानवर हमला न कर दे अत: गाड़ी को खड़ी कर सीट पर बैठे बैठे जब ध्यान से देखा तो वह कोई जंगली जानवर न हो कर एक बछड़ा था। ऐसे लगा जैसे मर गया हो पर प्रभु कृपा से वह अभी तक जीवित ही था।
चूंकि यह गौशाला नितांत निर्जन वनक्षेत्र में स्थित है अतः लोग रात के समय अपने नाकारा पशुओं को गौशाला से कुछ दूर चुपके से छोड़ कर चले जाते हैं। इस अभागे बछड़े के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा कौई निर्दयी और स्वार्थी व्यक्ति रात के समय गाड़ी से धक्का दे कर इसे छोड़ कर चला गया होगा।
खैर मैंनें गौशाला के ग्वालों की सहायता से उसे वहां से गाड़ी में डाल कर गोशाला पहुंचाया। गौर से देखने पर पता चला कि वह अपनी पिछली टांग पर भार नहीं दे पा रहा था। शायद गिराते समय कोई गहरी चोट आई हो।उसे घास पानी दिया गया पर लगता था जैसे भारी पीड़ा से वह कराह रहा हो।
वाह रे स्वार्थी मानव।
कमल देव कौशल

04/12/2021

संसार में दो तरह के लोग हैं एक वह जिनके पास सब कुछ होते हुये भी कुछ नहीं है, चाहे जाकर उन लोगों से पूछ लो और दूसरे वह जिनके पास कुछ न होते हुये भी उसमें से वह कुछ निकाल ही लेते हैं।फिर चाहे वह श्रम के रूप में हो या किसी अन्य वस्तु के रूप में हो। यही तो श्रद्धा की पराकाष्ठा है कि इसे किसी भी यंत्र अथवा युक्ति से मापा नहीं जा सकता। उनके भीतर श्रद्धा का सागर मानों हिलोरें मारता है। ऐसे श्रद्धावान लोग मेरे लिये पूजनीय वंदनीय हैं।
मां नैनादेवी जी के आंचल में शैल पर्वत पर स्थित दो सुंदर गांव हैं। जिनका नाम है अजनोल और डडोह। यहां के लोगों के मन भी गांव के अनुरुप ही हैं। गोमाता के प्रति इनकी आस्था देखते ही बनती है, इसे मैं महामाई का प्रभाव मानता हूं।
मैं हैरान हूं जबकि आज के युग में हर व्यक्ति समयाभाव का रोना रोता है कुछ एक दिव्य आत्मायें जो मनुष्य रूप में धरा पर अवतरित होती रहती हैं प्राणी मात्र की सेवा में कुछ समय निकाल ही लेती हैं।
जी हां, मेरा तात्पर्य है इन्हीं गांव के निवासियों श्री राजेंद कुमार जी, श्री रणदीप सिंह जी नंबरदार एवं श्री प्रदीप चंदेल जी, जिन्होंने अतिदुर्गम स्थानों से गोशाला में चारे हेतु स्वयं घास काटा, उसे ढोया और गौशाला के ट्रैक्टर में लादा।इतना ही नहीं ग्वालों को सुस्वादु भोजन भी खिलाया।
मैं गोशाला प्रबंधन की ओर से इनका हार्दिक आभार प्रकट करता हूं और प्रभु से इनके यश मान, सुख संतोष और धन धान्य की प्रचुरता की कामना करता हूं।
जय माता दी जय श्री कृष्ण जय गौमाता
कमल देव कौशल

मेरे देश में न तो श्रद्धा की कमी है और न ही श्रद्धावान व्यक्तियों की। वैसे भी श्रद्धा को किसी भी तराजू में तोलना असंभव ह...
03/12/2021

मेरे देश में न तो श्रद्धा की कमी है और न ही श्रद्धावान व्यक्तियों की। वैसे भी श्रद्धा को किसी भी तराजू में तोलना असंभव हैं।
मुझे गौशाला में दो प्रकार के व्यक्तिओं के दर्शन होते हैं एक सामर्थ्यवान और दूसरे सामर्थ्य हीन। लेकिन एक बात जो दोनों में समान दिखाई देती है वह है उनके भीतर हिलोरें लेते हुआ श्रद्धा का अपार सागर। मेरे लिये दोनों ही पूजनीय वंदनीय हैं।
आज मां नैनादेवी जी के आंचल में पर्वत शिखर पर बसे गांव अजनोल और डडोह के गोभक्तो जिसमें श्री राजेंद्र कुमार जी, श्री रणदीप सिंह जी नंबरदार एवं श्री प्रदीप चंदेल जी जिन्होंने स्वयं घास काट एवं ढो कर गौशाला के ट्राले में लादा। इतने सुदूर बैठे फिर भी गौमाता की इतनी चिंता धन्य हैं यह लोग। इन्होंने चारे की सेवा तो की ही साथ में ग्वालों को सुस्वादु भोजन भी करवाया।
मैं इनका कैसे धन्यवाद करूं मेरे पास शव्द ही नहीं है।
मां भगवती की इन पर कृपा एवं गोमाता के प्रति इनकी प्रीति इसी प्रकार बनी रहे, इसी कामना के साथ
जय मां नयना जय श्री कृष्ण जय गौमाता
कमल देव कौशल

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