09/08/2025
"इंतज़ार का सफ़र"
एक इंतज़ार… जो कभी ख़त्म ना हुआ,
नज़र अब भी उसी राह में टिकी है।
जहाँ वो मुस्कुराकर गुज़रा था,
वहीं दिल bank की तरह
आज भी अपना हिसाब रखता है —
कितनी यादें जमा हुईं,
कितना दर्द उधार बचा।
पत्थरों की ये सीढ़ियाँ गवाह हैं,
कि समय बीत सकता है,
पर कुछ मंज़िलें नहीं बदलतीं।
Arun Raj आज भी वहीं बैठा है,
जैसे दिल को यकीन हो,
कि वो लौटकर आएगी
और ये इंतज़ार पूरा होगा।
#सफर