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01/06/2026

सुबह सुबह बजरंगबली के दर्शन से करें, दिन मंगलमय हो जाएगा।

जय श्री राम 🚩



#मंगलवारस्पेशल
#सनातन

कलयुग में साल की यह सबसे दुर्लभ और शक्तिशाली एकादशी मानी जाती है ये…लाखों लोग आज व्रत और पूजा कर रहे हैं।आज पुरुषोत्तम म...
27/05/2026

कलयुग में साल की यह सबसे दुर्लभ और शक्तिशाली एकादशी मानी जाती है ये…
लाखों लोग आज व्रत और पूजा कर रहे हैं।

आज पुरुषोत्तम मास की पद्मिनी एकादशी है।
इसे कामिनी एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एकादशी केवल अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में आती है, इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

📖 मान्यता क्या है?
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस एकादशी का महत्व बताया था।
इस दिन व्रत, पूजा, दान और जागरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।

कैसे मनाई जाती है?
1- सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
2- कई भक्त निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं।
3- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
4- रात में भजन-कीर्तन और जागरण किया जाता है।
5- तुलसी पूजन, दीपदान और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति के मन,कर्म और भाग्य तीनों को शुद्ध करती है।

ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः 🙏

Good morning dear friends
25/05/2026

Good morning dear friends

जिस दिन माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरीं,उस दिन पाप भी कांप उठे थे… ।शुक्लपक्षस्य दशमी ज्येष्ठे मासि द्विजोत्तमाः।हरते द...
24/05/2026

जिस दिन माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरीं,
उस दिन पाप भी कांप उठे थे… ।

शुक्लपक्षस्य दशमी ज्येष्ठे मासि द्विजोत्तमाः।
हरते दश पापानि तस्माद्दशहरा स्मृता।। 🚩

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी दस प्रकार के पापों का नाश करती है, इसलिए इसे दशहरा कहा गया है।

हर हर गंगे 🙏🏻

पूजा-पाठ में आचमन का महत्व〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️आचमन का अर्थ है पूजा, यज्ञ आदि धार्मिक कार्य शुरू करने से पहले मंत्रोच्चारण के स...
22/05/2026

पूजा-पाठ में आचमन का महत्व
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आचमन का अर्थ है पूजा, यज्ञ आदि धार्मिक कार्य शुरू करने से पहले मंत्रोच्चारण के साथ पवित्र जल का आचमन कर शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि करना। इसे शुद्धि की पहली सीढ़ी माना गया है। इससे साधक का मन एकाग्र होता है और पूजा का फल बढ़ता है।
आचमन सामान्यतः तीन बार किया जाता है। प्रत्येक बार नीचे दिए गए मंत्रों का उच्चारण करते हुए जल ग्रहण किया जाता है।
१-ॐ केशवाय नमः
२-ॐ नारायणाय नमः
३-ॐ माधवाय नमः
४-ॐ हृषीकेशाय नमः
इसके बाद ब्रह्मतीर्थ (अंगूठे के मूल भाग) से दो बार होंठ पोंछकर हाथों को शुद्ध किया जाता है। यदि यह विधि पूरी न हो सके, तो केवल दाहिने कान का स्पर्श करने से भी आचमन की पूर्णता मानी जाती है।
हथेली में पाँच तीर्थ माने गए हैं।
१-देवतीर्थ
२-पितृतीर्थ
३-ब्रह्मतीर्थ
४-प्रजापत्यतीर्थ
५-सौम्यतीर्थ
आचमन सदैव ब्रह्मतीर्थ से ही करना चाहिए। शांत मन से, बिना शब्द किए, तीन बार आचमन करना श्रेष्ठ माना गया है।
स्मृति ग्रंथों में कहा गया है।
पहले आचमन से ऋग्वेद, दूसरे से यजुर्वेद और तीसरे से सामवेद तृप्त होते हैं।
आचमन के पश्चात मस्तक, नेत्र, नासिका और कानों का स्पर्श करने से क्रमशः विभिन्न दिव्य शक्तियों की प्रसन्नता मानी गई है।
मान्यता है कि विधिपूर्वक आचमन करने से पूजा का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है और साधक को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

सुप्रभात वंदन 🙏

खुश रहिए, मुस्कुराते रहिए।Happy Sunday 🌸
17/05/2026

खुश रहिए, मुस्कुराते रहिए।
Happy Sunday 🌸

ऊं आदित्याय नमः 🙏 भगवान सूर्य देव की अनंत कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।
17/05/2026

ऊं आदित्याय नमः 🙏
भगवान सूर्य देव की अनंत कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।

शुभ प्रभात मित्रों कैसे हैं आप सभी..
08/04/2026

शुभ प्रभात मित्रों कैसे हैं आप सभी..


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