16/06/2026
हे भगवान ! ये कैसा संयोग ?
"संयोग कभी-कभी इतना निर्मम भी हो सकता है ? ऐसा कोई कभी सोच भी नहीं सकता। चार भाई, जिनकी उम्र 25 से 33 वर्ष के बीच थी और जो कभी एक साथ मजदूरी पर नहीं जाते थे।
लेकिन, आज पता नहीं क्यों एक ही ऑल्टो कार में सवार होकर घर से मजदूरी पर निकल पड़े। उनको भी नहीं पता था कि ये उनका अंतिम साथ साबित होगा।
रास्ते में रोडवेज बस ने ऑल्टो कार को टक्कर मार दी और अगले ही क्षण चारों भाई काल का ग्रास बन गए।
चारों भाइयों का जीवन एक साथ समाप्त हो गया। जिस आँगन में चार बेटों की आवाजें गूंजती थीं। उस आँगन में आज सिर्फ सन्नाटा और परिवार की चीख पुकार, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
माता-पिता के लिए यह केवल चार संतानों का वियोग नहीं, बल्कि अपने भविष्य, अपने संबल और अपनी सारी उम्मीदों को एक साथ खो देने जैसा है। पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कुछ घटनाएँ समाचार से आगे बढ़कर मानवीय संवेदना का विषय बन जाती हैं। यह भी एक ऐसी ही घटना है, जो हमें जीवन की अनिश्चितता और नियति की कठोरता के सामने निःशब्द खड़ा कर देती है।
पूरा घटनाक्रम बालोतरा जिले के पाटोदी का है।
#बालोतरा