12/03/2026
नीलकंठ त्रिलोचन भोले,
गंगा जटा में धारे।
चन्द्र सजाए मस्तक ऊपर,
भस्म लगाएँ सारे।
डमरू की जब ध्वनि बजे,
नाचे सारा संसार।
कैलाशपति शिव शंकर,
करते सबका उद्धार।
नंदी साथ में चलते उनके,
सर्प बने श्रृंगार।
जो भी ले नाम शिव का,
कट जाए दुख भार।
हर हर महादेव की गूँज से,
पवित्र हो हर धाम।
भोले बाबा की कृपा से,
सिद्ध हो सब काम।