17/05/2026
धुल-हिज्जा के पहले दस दिन इस्लाम में सबसे ज़्यादा मुबारक, अज़ीम और अल्लाह को पसंदीदा दिनों में से हैं।
ये रहमत, मग़फ़िरत, इबादत और बहुत बड़े अज्र वाले दिन हैं। इन दिनों में की गई हर नमाज़, हर सच्ची दुआ, हर सदक़ा और अल्लाह की याद में बिताया गया हर लम्हा ज़्यादा क़ीमती होता है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “अल्लाह को नेक आमाल किसी भी दिनों में इतने पसंद नहीं जितने इन दस दिनों में पसंद हैं।” (सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 969)
अल्लाह तआला ने क़ुरआन में इन दिनों की क़सम खाई:
“क़सम है फ़ज्र की, और दस रातों की। (सूरह अल-फ़ज्र 89:1–2)
बहुत से उलमा ने बयान किया है कि “दस रातों” से मुराद धुल-हिज्जा के पहले दस दिन हैं। ये दिन एक बेहतरीन मौक़ा हैं:
• नमाज़ और ज़िक्र में इज़ाफ़ा करने का
• क़ुरआन पढ़ने और उस पर ग़ौर करने का
• खुलकर सदक़ा करने का
• सच्चे दिल से तौबा और इस्तिग़फ़ार करने का
• लोगों के साथ भलाई और नरमी करने का
• पहले नौ दिनों के रोज़े रखने का
• ख़ास तौर पर यौमे-अरफ़ा का रोज़ा रखने का
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “यौमे-अरफ़ा का रोज़ा पिछले एक साल और आने वाले एक साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाता है।” (सहीह मुस्लिम, हदीस 1162)
इन क़ीमती दिनों को ग़फ़लत और दुनियावी मशग़लों में ज़ाया मत कीजिए। बहुत से लोग जो पिछला धुल-हिज्जा देख चुके थे, आज इस दुनिया में नहीं रहे। हो सकता है ये अल्लाह की तरफ़ से हमारे लिए एक और मौक़ा हो तौबा करने का, उसके क़रीब होने का और उसकी रहमत हासिल करने का।
अपने दिनों को इन चीज़ों से भर दीजिए: • तकबीर “अल्लाहु अकबर”
• तहमीद — “अल्हम्दुलिल्लाह”
• तहरील — “ला इलाहा इल्लल्लाह”
• तस्बीह — “सुब्हानल्लाह”
अल्लाह तआला हमें इन मुबारक दिनों को पाने की तौफ़ीक़ दे, हमारी इबादतों और नेक आमाल को क़ुबूल फ़रमाए, हमारे गुनाहों को माफ़ करे और हमें इख़्लास के साथ उसकी इबादत करने वाला बनाए। आमीन।
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